रोहतास: डिजिटल पेमेंट के दौर में जहां UPI का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है, वहीं रोहतास जिले के सासाराम में कुछ छोटे दुकानदार अब दोबारा नकद लेनदेन की ओर लौटते नजर आ रहे हैं। धर्मशाला चौक और आसपास के बाजारों में कई दुकानों पर दुकानदारों ने ‘सिर्फ कैश’ में भुगतान लेने से संबंधित पोस्टर और स्टीकर लगाना शुरू कर दिया है।
दुकानदारों का कहना है कि UPI के जरिए भुगतान लेने पर MDR यानी Merchant Discount Rate को लेकर उन्हें अतिरिक्त लागत की चिंता सता रही है। इसी वजह से कुछ दुकानदार डिजिटल भुगतान के बजाय नगद लेनदेन को प्राथमिकता देने की बात कह रहे हैं।
सासाराम के धर्मशाला चौक के आसपास चप्पल-जूता समेत कई तरह की दुकानों में ऐसे पोस्टर दिखाई देने लगे हैं। दुकानदारों के अनुसार, पहले ग्राहक आसानी से मोबाइल से UPI स्कैन कर भुगतान कर देते थे। लेकिन अब कुछ दुकानदारों ने अपनी दुकानों पर यह स्पष्ट कर दिया है कि सामान की खरीद-बिक्री के लिए नकद भुगतान किया जाए।
दुकानदार बोले- पहले से कई तरह के टैक्स का बोझ
चप्पल-जूता कारोबारी विनय प्रताप का कहना है कि छोटे व्यापारियों पर पहले से ही अलग-अलग तरह के कर और कारोबारी खर्च का दबाव रहता है। उनका कहना है कि सेल टैक्स, इनकम टैक्स और स्थानीय निकाय से जुड़े टैक्स व अन्य खर्चों के बीच यदि डिजिटल भुगतान पर भी अतिरिक्त लागत आती है तो छोटे दुकानदारों के लिए परेशानी बढ़ सकती है।
विनय प्रताप के मुताबिक, इसी वजह से वह फिलहाल नकद लेनदेन को प्राथमिकता दे रहे हैं। उनका कहना है कि दुकानदारों के लिए ऐसा भुगतान माध्यम अधिक सुविधाजनक है, जिसमें उन्हें अतिरिक्त शुल्क या लागत की चिंता न करनी पड़े।
डिजिटल भुगतान से नकदी की ओर लौटने की कोशिश
UPI ने पिछले कुछ वर्षों में छोटे दुकानदारों के लिए भुगतान लेना काफी आसान किया है। ग्राहक मोबाइल से कुछ सेकेंड में भुगतान कर देते हैं और दुकानदार को खुले पैसे रखने की जरूरत भी कम हो जाती है। लेकिन सासाराम के कुछ छोटे कारोबारी अब लागत को लेकर अपनी रणनीति बदलने की बात कर रहे हैं।
दुकानदारों का कहना है कि छोटे कारोबार में मुनाफा सीमित होता है। ऐसे में भुगतान से जुड़ा कोई भी अतिरिक्त खर्च उनके लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। इसी कारण कुछ व्यापारी ग्राहकों से नकद भुगतान लेने की अपील कर रहे हैं।
बाजार में ग्राहकों के सामने भी बदल रहा विकल्प
धर्मशाला चौक के आसपास ‘सिर्फ कैश’ के पोस्टर लगने के बाद ग्राहकों के सामने भी भुगतान का विकल्प बदलता नजर आ रहा है। जहां पहले अधिकांश दुकानों पर QR कोड के जरिए भुगतान की सुविधा आसानी से उपलब्ध रहती थी, वहीं अब कुछ दुकानदार नकद भुगतान पर जोर दे रहे हैं।
हालांकि, सभी दुकानदार UPI बंद करने के पक्ष में हैं, ऐसा नहीं है। कई कारोबारियों के लिए डिजिटल भुगतान अभी भी ग्राहकों की सुविधा और बिक्री के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ऐसे में स्थानीय बाजार में नकद और डिजिटल भुगतान को लेकर अलग-अलग रुख देखने को मिल रहा है।
MDR को लेकर क्या है दुकानदारों की चिंता?
दुकानदारों की मुख्य चिंता Merchant Discount Rate यानी MDR को लेकर है। उनका मानना है कि डिजिटल भुगतान से जुड़ी लागत बढ़ने पर छोटे कारोबारियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। हालांकि, UPI भुगतान पर MDR के नियम भुगतान के प्रकार और संबंधित व्यवस्था पर निर्भर करते हैं। इसलिए किसी दुकान पर अतिरिक्त शुल्क वास्तव में लागू है या नहीं, यह संबंधित भुगतान व्यवस्था और लेनदेन की प्रकृति के आधार पर ही स्पष्ट हो सकता है।
फिलहाल सासाराम के बाजार में ‘सिर्फ कैश’ वाले पोस्टर चर्चा का विषय बने हुए हैं। दुकानदारों का कहना है कि वे अपने खर्च और भुगतान व्यवस्था को देखते हुए नकद लेनदेन को प्राथमिकता दे रहे हैं।
स्थानीय कारोबारियों की इस प्रतिक्रिया से यह सवाल भी उठ रहा है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के साथ छोटे दुकानदारों की लागत और भुगतान संबंधी चिंताओं को किस तरह दूर किया जाए। फिलहाल सासाराम के धर्मशाला चौक के बाजार में कुछ दुकानों पर लगे ‘सिर्फ कैश’ के पोस्टर बदलते भुगतान व्यवहार की तस्वीर जरूर दिखा रहे हैं।
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