भारत/नेपाल: नेपाल में हालिया बाढ़ और भूस्खलन को लेकर चीन पर समय रहते चेतावनी नहीं देने के आरोपों के बीच चीनी दूतावास ने लगातार तीसरे दिन अपना पक्ष रखा है। दूतावास ने कहा कि चीनी विशेषज्ञों ने उपलब्ध तकनीक की सीमाओं के भीतर लगातार निगरानी और आकलन किया और महत्वपूर्ण जानकारी नेपाल के साथ समय पर साझा की गई।
दूतावास के मुताबिक हिमालय में 4,000-5,000 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले बेहद दुर्गम इलाकों में बड़ी संख्या में ग्लेशियल झीलें और बर्फ-पत्थर के समूह मौजूद हैं। खड़ी ढलानों और जटिल भूभाग के कारण इन क्षेत्रों की उच्च सटीकता से निगरानी करना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चुनौतीपूर्ण है।
चीन ने 2015 के नेपाल भूकंप का भी हवाला दिया। उसका कहना है कि भूकंप से हिमालय की दक्षिणी ढलानों की चट्टानी संरचनाएं प्रभावित हुई थीं, जिससे ऊंचाई वाले इलाकों में चट्टानों के खिसकने का जोखिम और अनिश्चितता बढ़ी।
26 अगस्त को वर्चुअल बैठक
चीन के मौसम विज्ञान प्रशासन ने नेपाल के जल तथा मौसम विज्ञान विभाग के साथ तत्काल ऑनलाइन बैठक की। इसमें आपदा की स्थिति का आकलन करने और डेटा साझा करने पर चर्चा हुई।
चीन ने कहा कि वह अभी भी नेपाल के साथ जल-मौसम संबंधी सूचनाएं साझा कर रहा है, जिसमें प्राकृतिक रूप से बनी बैरियर लेक की निगरानी से जुड़ा डेटा भी शामिल है। इसके अलावा चीन ने नेपाल को ‘MAZU’ इंटेलिजेंट मौसम पूर्व चेतावनी समाधान के तहत शुरुआती अनुकूलित सेवाएं उपलब्ध कराने की जानकारी दी।
चीनी दूतावास का कहना है कि नेपाल और चीन के बीच सीमा-पार आपदा प्रबंधन को लेकर लगातार संपर्क और सहयोग जारी है। चीन ने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच सहयोग और मजबूत होगा, ताकि भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की क्षमता बेहतर हो सके।
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