दुमका: बाबा बासुकीनाथ की नगरी में एक महीने तक चली आस्था की यात्रा शुक्रवार को संपन्न हो गई। राजकीय श्रावणी मेला महोत्सव 2026 का समापन भव्य आयोजन और जीरो कैजुअल्टी के साथ हुआ। सावन के पूरे महीने देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं ने बाबा बासुकीनाथ के दरबार में जलार्पण किया।
जिला प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पूरे मेला अवधि में 46 लाख 95 हजार 605 श्रद्धालुओं ने बाबा बासुकीनाथ का जलाभिषेक किया। इसके अलावा 1 लाख 7 हजार 318 श्रद्धालुओं ने शीघ्र दर्शनम के जरिए बाबा के दर्शन किए, जबकि करीब 18 हजार डाक बम श्रद्धालुओं ने भी बाबा पर जल अर्पित किया।
एक महीने में 47 लाख भक्तों ने किए दर्शन
बाबा बासुकीनाथ धाम में सावन के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से लेकर देर रात तक मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र बोल बम के जयघोष से गूंजता रहा।
लगभग 47 लाख श्रद्धालुओं के जलार्पण के बावजूद मेला बिना किसी जान-माल की बड़ी अनहोनी के संपन्न होना प्रशासन के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। जिला प्रशासन ने इसे बेहतर प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय का परिणाम बताया।
मंदिर की आय 6 करोड़ रुपये से ज्यादा
श्रावणी मेला के दौरान बाबा बासुकीनाथ मंदिर को भी बड़ी आय हुई। प्रशासन के अनुसार, पूरे मेला अवधि में मंदिर की दर्ज कुल आय 6 करोड़ 4 लाख 92 हजार 417 रुपये रही।
इसमें सबसे बड़ा हिस्सा शीघ्र दर्शनम के कूपन से प्राप्त हुआ। कुल 1,07,318 शीघ्र दर्शनम कूपन से 5 करोड़ 36 लाख 59 हजार रुपये की आय हुई।
इसके अलावा दान पेटी से 42 लाख 69 हजार 190 रुपये, गोलक से 22 लाख 69 हजार 505 रुपये और अन्य स्रोतों से 2 लाख 92 हजार 972 रुपये प्राप्त हुए।
मंदिर को इस दौरान चांदी और सोना भी चढ़ावे के रूप में मिला। आंकड़ों के अनुसार करीब 8,159 ग्राम चांदी और 15 ग्राम सोना प्राप्त हुआ।
21,763 बिछड़े श्रद्धालु अपनों से मिले
इतनी बड़ी भीड़ के बीच परिजनों से बिछड़ने वाले श्रद्धालुओं को उनके परिवार तक पहुंचाने में सूचना सहायता व्यवस्था ने अहम भूमिका निभाई।
प्रशासन के अनुसार, मेला अवधि के दौरान 21,763 बिछड़े श्रद्धालुओं को उनके परिजनों से मिलाया गया। मेला क्षेत्र में सूचना केंद्रों और सहायता कर्मियों की तैनाती की गई थी, जिससे लोगों को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने और बिछड़े लोगों को उनके परिवार से मिलाने में मदद मिली।
श्रद्धालुओं के ठहरने और अन्य सुविधाओं के लिए भी प्रशासन की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए थे।
पहली बार जीरो कैजुअल्टी के साथ संपन्न हुआ मेला
समापन समारोह में दुमका के उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने कहा कि यह पहला वर्ष है जब राजकीय श्रावणी मेला महोत्सव बेहतर तरीके से जीरो कैजुअल्टी के साथ संपन्न हुआ।
उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को सुगमतापूर्वक जलार्पण कराना आसान चुनौती नहीं थी। इसके लिए बेहतर व्यवस्था और विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय जरूरी था।
डीसी ने मेला के सफल आयोजन में योगदान देने वाले सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, पुलिस जवानों और संबंधित विभागों का आभार जताया।
पुलिस से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक रहे अलर्ट
पूरे मेला के दौरान जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के साथ स्वास्थ्य विभाग, विद्युत विभाग, एनडीआरएफ और अन्य संबंधित विभागों ने अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।
भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, बिजली, पेयजल, आवासन और सूचना व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रशासन का कहना है कि मेला क्षेत्र में लगातार निगरानी और आपसी समन्वय के कारण बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को अपेक्षाकृत सुगम व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सकी।
इस बार किए गए कई नए प्रयोग
उपायुक्त ने कहा कि इस वर्ष मेला व्यवस्था में कई नए प्रयोग किए गए। इन प्रयोगों और पिछले अनुभवों के आधार पर आने वाले वर्षों में व्यवस्था को और बेहतर बनाने की योजना बनाई जाएगी।
उनका कहना था कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस विशाल धार्मिक आयोजन को सुरक्षित और सुगम बनाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रहा।
उत्कृष्ट काम करने वाले कर्मी सम्मानित
समापन समारोह के दौरान श्रावणी मेला के सफल संचालन में उत्कृष्ट योगदान देने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित भी किया गया।
मेला समाप्त होने के साथ ही एक महीने से बाबा बासुकीनाथ धाम में चल रही भक्तों की भारी भीड़ अब धीरे-धीरे कम होने लगी है। लेकिन इस वर्ष के आयोजन की पहचान 47 लाख के करीब श्रद्धालु, 6 करोड़ रुपये से अधिक की मंदिर आय, हजारों बिछड़े श्रद्धालुओं का पुनर्मिलन और जीरो कैजुअल्टी के रूप में दर्ज हो गई है।
प्रशासन अब इस वर्ष के अनुभवों और सुझावों को आधार बनाकर आने वाले श्रावणी मेलों की व्यवस्था को और बेहतर करने की तैयारी में जुटेगा।
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