पटना: बिहार में NEET धांधली मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की जांच में अब परीक्षा माफिया के कथित नेटवर्क के साथ-साथ फर्जी प्रमाणपत्रों के खेल की भी परतें खुलने लगी हैं। इस बार जांच के केंद्र में हैं NEET धांधली के आरोपी डॉ. रविशंकर की पत्नी मधु प्रिया, जिन पर OBC वर्ग से होने के बावजूद अनुसूचित जाति (SC) का प्रमाणपत्र बनवाने का आरोप लगा है।
जांच एजेंसी के अनुसार मधु प्रिया एक प्रतियोगी परीक्षा की अभ्यर्थी थीं। EOU को मिले दस्तावेजों और प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि वे अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से संबंधित हैं, लेकिन उनके नाम पर कथित तौर पर SC जाति प्रमाणपत्र जारी कराया गया। अब एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि यह प्रमाणपत्र किन परिस्थितियों में बना और इसके पीछे किसकी भूमिका रही।
पति की गिरफ्तारी के बाद पत्नी पर भी जांच का शिकंजा
NEET परीक्षा धांधली में गिरफ्तार डॉ. रविशंकर पहले से ही जांच एजेंसियों के निशाने पर हैं। आरोप है कि वह मेडिकल प्रवेश और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जी अभ्यर्थी बैठाने, बायोमेट्रिक में हेरफेर कराने और नकली दस्तावेज तैयार करवाने वाले नेटवर्क का हिस्सा था। अब उसकी पत्नी से जुड़ा कथित फर्जी जाति प्रमाणपत्र मामला सामने आने के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि क्या फर्जी जाति प्रमाणपत्र का इस्तेमाल किसी नौकरी, प्रवेश प्रक्रिया या आरक्षण लाभ के लिए किया गया था।
फर्जी दस्तावेजों का पूरा नेटवर्क आया सामने
EOU की छापेमारी में कई ऐसे दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिन्होंने जांच को नई दिशा दे दी है। अधिकारियों के अनुसार, गिरोह केवल परीक्षा में स्कॉलर बैठाने तक सीमित नहीं था, बल्कि जरूरत पड़ने पर अभ्यर्थियों के लिए फर्जी जाति, आय और दिव्यांगता प्रमाणपत्र भी तैयार करवाता था।
पटना स्थित एक फ्लैट से बड़ी संख्या में संदिग्ध प्रमाणपत्र, एडमिट कार्ड, अंकपत्र, ट्रांसफर सर्टिफिकेट और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं। इसके अलावा कई हस्ताक्षरित ब्लैंक चेक और नकदी भी बरामद हुई है।
12वीं के 10 साल बाद बना डॉक्टर, अब सवालों के घेरे में
जांच एजेंसी के अनुसार डॉ. रविशंकर ने वर्ष 2012 में इंटरमीडिएट पास किया था और करीब दस वर्ष बाद 2022 में NEET परीक्षा के जरिए मेडिकल कॉलेज में नामांकन लिया। इससे पहले उसका नाम राजस्थान में रेलवे भर्ती परीक्षा धांधली से जुड़े मामले में भी सामने आ चुका है।
अब जांच एजेंसियां उसके पूरे नेटवर्क, आर्थिक लेनदेन और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।
कई जिलों तक फैला है मामला
EOU की जांच में लखीसराय, नालंदा, नवादा, हाजीपुर समेत कई जिलों के बायोमेट्रिक वेंडरों और दस्तावेज तैयार करने वाले संदिग्ध लोगों की भूमिका सामने आई है। एजेंसी ने कई व्यक्तियों की पहचान कर ली है और उनसे पूछताछ की तैयारी चल रही है।
बढ़ सकती हैं मुश्किलें
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाने और उसका उपयोग करने के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और सरकारी लाभ प्राप्त करने से जुड़ी गंभीर धाराओं में कार्रवाई हो सकती है।
फिलहाल पूरे मामले पर EOU की नजर है और आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।