पटना: बिहार में कानून व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सियासी और प्रशासनिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। वजह है नगर निकाय के दो बड़े अधिकारियों की हत्या। महज चार महीने के अंदर दो कार्यपालक पदाधिकारियों (EO) की हत्या ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर बिहार में सरकारी अधिकारियों की सुरक्षा कितनी मजबूत है?
डेहरी-डालमियानगर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी विमल कुमार की हत्या के बाद मामला और गंभीर हो गया है। इससे पहले भागलपुर जिले के सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार की भी अपराधियों ने हत्या कर दी थी।
दोनों घटनाओं ने एक बात साफ कर दी है कि नगर निकाय जैसे महत्वपूर्ण विभागों में काम करने वाले अधिकारी अब अपराधियों के निशाने पर हैं।
पहली घटना: सुल्तानगंज में EO कृष्ण भूषण की हत्या
साल 2026 के अप्रैल महीने में भागलपुर के सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार की हत्या कर दी गई थी। अपराधियों ने कार्यालय परिसर में घुसकर गोली मारकर उनकी जान ले ली थी।
इस घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों तक पहुंचने का दावा किया था, लेकिन घटना ने प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे।
दूसरी घटना: डेहरी के EO विमल कुमार की हत्या
अब डेहरी-डालमियानगर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी विमल कुमार की हत्या ने पूरे बिहार को झकझोर दिया है।
औरंगाबाद जिले के बारुण थाना क्षेत्र में घनौती पुल के पास उनकी हत्या की गई। शुरुआती जांच में पुलिस ने उनके ड्राइवर को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, ड्राइवर ने पूछताछ में हत्या की बात स्वीकार की है।
हालांकि, मृतक अधिकारी की पत्नी ने इस मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने डेहरी विधायक सोनू सिंह पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पति पर दबाव बनाया जा रहा था और 50 लाख रुपये की मांग की गई थी।
इन आरोपों के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है। हालांकि आरोपों की पुलिस जांच कर रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगा।
नगर निकाय के अधिकारी ही क्यों बन रहे निशाना?
राजनीतिक और सामाजिक जानकारों का मानना है कि नगर परिषद और नगर निकायों में विकास योजनाओं, ठेके, निर्माण कार्य और भुगतान जैसे मामलों में बड़ी आर्थिक गतिविधियां होती हैं।
ऐसे में कई बार स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों के बीच टकराव की स्थिति बनती है।
वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि दोनों घटनाओं में आर्थिक और राजनीतिक विवाद की बातें सामने आई हैं। हालांकि जांच एजेंसियां ही यह स्पष्ट कर पाएंगी कि असली वजह क्या थी।
विपक्ष का सरकार पर हमला
विमल कुमार हत्याकांड के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार पर हमला बोला है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के पद संभालने के कुछ ही महीनों के अंदर दो सरकारी अधिकारियों की हत्या हो चुकी है। तेजस्वी यादव ने कहा कि अगर सरकार अपने अधिकारियों को सुरक्षा नहीं दे सकती तो आम जनता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेगी?
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मृतक अधिकारी के परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के आधार पर संबंधित लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
तेजस्वी यादव ने मामले की निष्पक्ष जांच और न्यायिक निगरानी में जांच की मांग की है।
क्या बिहार में अपराध नियंत्रण बड़ी चुनौती बन रहा है?
बिहार में अपराध हमेशा से राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा रहा है। सरकारें दावा करती रही हैं कि अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाएं सवाल खड़े कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल त्वरित कार्रवाई या गिरफ्तारी से अपराध पर पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं है। इसके लिए मजबूत पुलिसिंग, प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा और स्थानीय स्तर पर खुफिया तंत्र को मजबूत करना जरूरी है।
नीतीश कुमार मॉडल की फिर चर्चा क्यों?
दो अधिकारियों की हत्या के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या बिहार को फिर से पुराने प्रशासनिक मॉडल की जरूरत है?
कुछ जानकारों का कहना है कि नीतीश कुमार के शासनकाल में कानून व्यवस्था को लेकर जो रणनीति अपनाई गई थी, उससे सरकार को सीख लेने की जरूरत है।
उनका तर्क है कि अपराध नियंत्रण के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ-साथ पुलिस प्रशासन की स्वतंत्र कार्यप्रणाली भी जरूरी होती है।
सबसे बड़ा सवाल: अफसर सुरक्षित नहीं तो आम आदमी कैसे सुरक्षित?
विमल कुमार और कृष्ण भूषण कुमार की हत्या ने सिर्फ दो परिवारों को नहीं बल्कि पूरे प्रशासनिक सिस्टम को झकझोर दिया है।
अब सवाल सिर्फ इन हत्याओं की जांच तक सीमित नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि क्या बिहार में सरकारी अधिकारी बिना दबाव और डर के काम कर पाएंगे?
क्योंकि अगर विकास योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने वाले अधिकारी ही असुरक्षित महसूस करेंगे, तो इसका असर सीधे शासन व्यवस्था और आम जनता पर पड़ेगा।
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