किशनगंज: बिहार के किशनगंज में सड़क हादसे के बाद एक डॉक्टर की मौत ने सदर अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक डॉक्टर अनिल कुमार सिंह के साथ हादसे में घायल हुए उनके मित्र और सीएम साइंस कॉलेज के प्रोफेसर राधेश्याम शर्मा ने आरोप लगाया है कि सदर अस्पताल पहुंचने के बाद घायलों को समय पर समुचित इलाज नहीं मिला। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार से की है।
अस्पताल पहुंचने के बाद इलाज में देरी का आरोप
प्रोफेसर राधेश्याम शर्मा के मुताबिक, हादसे में घायल लोगों को सुबह करीब 7:15 बजे किशनगंज सदर अस्पताल लाया गया था। उनका आरोप है कि करीब 10 बजे तक समुचित इलाज शुरू नहीं हो सका।
उनके अनुसार, इसी दौरान घायल डॉक्टर अनिल कुमार सिंह की हालत लगातार बिगड़ती गई और आखिरकार उनकी मौत हो गई। राधेश्याम शर्मा ने अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए अपने इलाज और जांच को लेकर भी परेशानी का आरोप लगाया है।
हालांकि, ये आरोप अभी जांच का विषय हैं। सदर अस्पताल प्रशासन ने इलाज में लापरवाही के आरोपों से इनकार किया है। अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अनवार हुसैन ने कहा कि अस्पताल पहुंचने वाले सभी घायलों का इलाज शुरू कर दिया गया था।
स्वास्थ्य मंत्री से CCTV जांच की मांग
प्रोफेसर राधेश्याम शर्मा ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि हादसे के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाए जाने से लेकर उपचार शुरू होने तक की प्रक्रिया की जांच की जानी चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से सुबह 7 बजे से 10 बजे तक की सदर अस्पताल की CCTV फुटेज की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि CCTV फुटेज और अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड से यह स्पष्ट हो सकता है कि घायलों को अस्पताल पहुंचने के बाद कितनी देर में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।
उन्होंने जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है।
क्या था पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब 5 बजे सुखानी थाना क्षेत्र में NH-327E पर ट्रक और कार की जोरदार टक्कर हुई थी। कार में चार लोग सवार थे। हादसे में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन लोग घायल हुए थे। बाद में घायलों में शामिल डॉक्टर अनिल कुमार सिंह ने सदर अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
मृतकों में 65 वर्षीय डॉक्टर अनिल कुमार सिंह, निवासी बहेरी, दरभंगा और 50 वर्षीय पवन यादव, निवासी अमरामथ, मधुबनी शामिल हैं।
हादसे में 52 वर्षीय तेज नारायण मुखिया, निवासी सिंहिया, समस्तीपुर और 50 वर्षीय राधेश्याम शर्मा, निवासी मधुबनी घायल हुए।
राखी बंधवाने बहन के घर जा रहे थे
बताया गया कि कार सवार सभी लोग मधुबनी से सिलीगुड़ी जा रहे थे। उनका उद्देश्य रक्षाबंधन के मौके पर अपनी बहन से राखी बंधवाना था। इसी दौरान सुखानी थाना क्षेत्र में यह हादसा हो गया।
आरोप है कि गलत दिशा से आ रहे एक ट्रक ने उनकी कार में टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि पवन यादव की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि डॉक्टर अनिल कुमार सिंह ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस भी सदर अस्पताल पहुंची। यातायात थानाध्यक्ष संदीप कुमार के अनुसार, दुर्घटना में दो लोगों की मौत हुई और उनके परिजनों को घटना की सूचना दी गई।
अब जांच से सामने आएगी सच्चाई
इस मामले में फिलहाल दो अलग-अलग दावे सामने हैं। घायल प्रोफेसर की ओर से अस्पताल में इलाज में देरी और व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जबकि सदर अस्पताल प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज किया है।
ऐसे में CCTV फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड और अस्पताल की उपचार प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच अहम हो सकती है। इन्हीं दस्तावेजों से यह पता चल सकेगा कि हादसे के बाद घायलों को अस्पताल में किस समय चिकित्सा सुविधा मिली और डॉक्टर अनिल कुमार सिंह की हालत बिगड़ने के दौरान क्या उपचार किया गया।
मामले को लेकर परिजनों और सहयोगियों की ओर से जांच की मांग की जा रही है। अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग की संभावित जांच और उसके निष्कर्ष पर टिकी हैं।