जमुई: कभी जिन गांवों का नाम आते ही नक्सली खौफ की तस्वीर सामने आती थी, उसी इलाके की महिलाएं इस बार रक्षाबंधन पर करीब 50-60 किलोमीटर का सफर तय कर जिला मुख्यालय पहुंचीं। हाथों में राखी थी और मन में डर नहीं, बल्कि भरोसा था। समाहरणालय पहुंचकर महिलाओं ने जिलाधिकारी नवीन कुमार और पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल समेत अधिकारियों की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधा।
यह सिर्फ राखी बांधने का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि जमुई के उन इलाकों में बदलते माहौल की तस्वीर थी, जहां कभी ग्रामीण पुलिस-प्रशासन से दूरी बनाए रखने को मजबूर थे। गुरमाहा, चोरमारा और मुसहरीटांड जैसे पूर्व अति-नक्सल प्रभावित इलाकों से आई महिलाओं ने प्रशासन के साथ अपने रिश्ते को एक नए अंदाज में जाहिर किया।
डर की जगह अब भरोसा
महिलाओं के मुताबिक, पहले हालात ऐसे थे कि पुलिस को देखते ही ग्रामीण सहम जाते थे। लेकिन समय के साथ सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासन की सक्रियता और विकास कार्यों की पहुंच ने माहौल बदला। अब बच्चे नियमित स्कूल जा रहे हैं और गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं, एंबुलेंस, राशन और पेयजल जैसी सुविधाएं पहुंच रही हैं।
राखी के धागे में छिपा बड़ा संदेश
महिलाओं ने कहा कि जिस तरह भाई परिवार की रक्षा का जिम्मा निभाता है, उसी तरह जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक उनके इलाकों में सुरक्षा और विकास सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसी विश्वास को लेकर वे जिला मुख्यालय पहुंचीं।
डीएम नवीन कुमार ने महिलाओं के इस कदम को भावुक करने वाला क्षण बताया। उन्होंने कहा कि सुदूर क्षेत्रों की महिलाएं खुद जिला मुख्यालय आकर प्रशासन पर विश्वास जता रही हैं, यह खुशी की बात है। उन्होंने इन क्षेत्रों में जरूरी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता से पूरा करने की बात कही।
जहां कभी खौफ था, वहां अब विकास की बात
जमुई के इन इलाकों में बदलाव की कहानी सिर्फ रक्षाबंधन तक सीमित नहीं है। प्रशासन के अनुसार, हाल के समय में स्वास्थ्य, शिक्षा, राशन और पेयजल जैसी सुविधाओं की पहुंच बढ़ी है। गुरमाहा और चोरमारा में आशा कार्यकर्ताओं के चयन को भी इसी बदलाव की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।
रक्षाबंधन पर महिलाओं की यह पहल इसलिए खास बन गई, क्योंकि राखी का यह धागा सिर्फ कलाई पर नहीं बंधा—इसने प्रशासन और ग्रामीणों के बीच भरोसे के रिश्ते को भी मजबूत करने का संदेश दिया। जमुई में यह तस्वीर मानो कह रही थी—जहां कभी डर था, वहां अब संवाद है; जहां दूरी थी, वहां अब भरोसा है।
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