पटना: बिहार में आरक्षण का मुद्दा अब विपक्ष बनाम सत्ता की लड़ाई से निकलकर NDA के भीतर की बहस बन गया है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और क्रीमी लेयर की चर्चा पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने तीखी आपत्ति जताई है। चिराग ने साफ कहा कि अगर मांझी आरक्षण में क्रीमी लेयर का प्रावधान चाहते हैं, तो पहले अपने पद से इस्तीफा दें।
मांझी ने आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत बताते हुए कहा था कि इसका लाभ वास्तविक रूप से जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने पंजाब और हरियाणा की तर्ज पर कोटे के भीतर कोटा लागू करने की मांग भी रखी थी। उनके बेटे और बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने भी SC-ST आरक्षण में उप-वर्गीकरण का समर्थन किया था।
चिराग ने बताया आरक्षण का मूल आधार
चिराग पासवान ने कहा कि आरक्षण की व्यवस्था केवल आर्थिक असमानता दूर करने के लिए नहीं बनाई गई थी। देश में लंबे समय तक जाति और सामाजिक आधार पर भेदभाव हुआ। इसी सामाजिक असमानता को कम करने और वंचित वर्गों को बराबरी का अवसर देने के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई।
उन्होंने कहा कि इसे सिर्फ आर्थिक स्थिति से जोड़ना संविधान की मूल भावना से अलग होगा। यदि आरक्षण को लेकर संविधान में बदलाव की आवश्यकता महसूस होती है तो इस पर संसद में खुली और गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
मांझी के साथ बेटे संतोष पर भी निशाना
चिराग ने कहा कि यदि जीतन राम मांझी क्रीमी लेयर की व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं और उनके बेटे संतोष कुमार सुमन भी इसका समर्थन करते हैं, तो दोनों को अपने पदों के बारे में विचार करना चाहिए। चिराग का यह बयान NDA के भीतर आरक्षण को लेकर मतभेद को खुलकर सामने लाता है।
‘आरक्षण को राजनीति का हथियार न बनाएं’
चिराग ने नेताओं पर आरक्षण के नाम पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि यह बेहद संवेदनशील विषय है और इस पर फैसला राजनीतिक फायदे के बजाय सामाजिक प्रभाव को ध्यान में रखकर होना चाहिए।
राहुल गांधी को भी घेरा
आरक्षण और सामाजिक भेदभाव के सवाल पर चिराग ने राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि आज समाज में भेदभाव मौजूद है तो देश में लंबे समय तक शासन करने वाली कांग्रेस को भी अपने कार्यकाल और नीतियों पर जवाब देना चाहिए।
आरक्षण की समीक्षा बनाम सामाजिक न्याय की मूल अवधारणा—मांझी और चिराग के अलग-अलग रुख ने NDA के भीतर इस मुद्दे को नई राजनीतिक बहस में बदल दिया है।
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