पटना: बिहार की सुस्त पड़ी भर्ती मशीनरी को आखिरकार ‘झटका’ मिल गया है। सख्त तेवर और त्वरित कार्रवाई के लिए मशहूर रिटायर्ड आईपीएस शोभा ओहटकर को बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) का स्थायी अध्यक्ष बना दिया गया है। उनके आते ही यह साफ संकेत मिल गया है कि अब ढीले-ढाले सिस्टम पर ‘हंटर’ चलना तय है।
करीब 36 साल की दमदार सेवा और कड़क प्रशासनिक छवि के साथ ओहटकर की तैनाती ऐसे वक्त पर हुई है, जब आयोग पर लंबित परीक्षाओं, लेट रिजल्ट और पेपर लीक जैसे आरोपों का दबाव है। सरकार को उम्मीद है कि अब फाइलों की धूल झटके में साफ होगी और भर्ती प्रक्रिया रफ्तार पकड़ेगी।
क्यों खास है यह नियुक्ति?
अब तक BSSC बिना स्थायी अध्यक्ष के ‘ऑटो मोड’ पर चल रहा था। नतीजा—भर्तियां लटकीं, परीक्षाएं टलीं और लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में रहा। लेकिन ‘हंटर वाली मैडम’ की एंट्री को सिस्टम में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तरह देखा जा रहा है।
पेपर लीक माफियाओं पर गिरेगी गाज?
बिहार में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक लंबे समय से बड़ा मुद्दा रहा है। ओहटकर की सख्ती को देखते हुए यह कयास लगाए जा रहे हैं कि अब परीक्षा माफियाओं की ‘खैर नहीं’ होगी। सूत्रों की मानें तो आयोग के अंदरूनी सिस्टम में भी बड़े बदलाव की तैयारी है।
1.72 लाख नौकरियां—अब परीक्षा की असली परीक्षा
सरकार पहले ही 1.72 लाख से ज्यादा पदों पर भर्ती की तैयारी में है। ऐसे में BSSC की भूमिका निर्णायक हो जाती है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या ‘आयरन लेडी’ इन भर्तियों को समय पर और पारदर्शी तरीके से पूरा कर पाएंगी?
सड़क से लेकर सिस्टम तक, हर जगह दिखी सख्ती
दरभंगा, पटना, वैशाली और सारण में अपने कार्यकाल के दौरान ओहटकर ने अपराधियों और मनचलों के खिलाफ जिस तरह की कार्रवाई की, उसी ने उन्हें ‘हंटर वाली मैडम’ बना दिया। अब वही सख्ती भर्ती सिस्टम में देखने को मिल सकती है।
सवाल भी कम नहीं…
हालांकि, चुनौतियां भी कम नहीं हैं—लंबित परीक्षाओं का अंबार, अभ्यर्थियों का गुस्सा और सिस्टम की जड़ता। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह ‘सख्त चेहरा’ वाकई बदलाव ला पाएगा या फिर सिस्टम एक बार फिर पुराने ढर्रे पर लौट जाएगा।
फिलहाल इतना तय है—BSSC में अब ‘आराम’ नहीं, ‘एक्शन’ का समय शुरू हो चुका है।
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