पटना: पटना में 20 जुलाई से शुरू होने वाला बिहार विधानमंडल का मानसून सत्र इस बार सिर्फ सत्र नहीं, बल्कि सत्ता और विपक्ष के बीच सीधी टक्कर का मैदान बनने जा रहा है।
नए राजनीतिक समीकरणों के बीच पहली बार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई में अनुपूरक बजट पेश होगा। करीब 50 हजार करोड़ रुपये का यह बजट वित्त मंत्री बिजेंद्र यादव सदन के पटल पर रखेंगे, जिसमें शिक्षा और स्वास्थ्य सेक्टर को बड़ी प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है।
लेकिन असली खेल बजट नहीं, बल्कि बहस का होगा—जहां हर दिन नया राजनीतिक धमाका तय माना जा रहा है।
Bihar Legislative Assembly के इस सत्र में विपक्ष पूरी तरह आक्रामक मूड में है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद सरकार को एनकाउंटर, टेंडर घोटाला और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर घेरने की रणनीति बना चुका है।
सबसे बड़ा मुद्दा बन सकता है भोजपुर का “भरत तिवारी एनकाउंटर”, जिस पर विधि-व्यवस्था को लेकर सवाल उठने तय हैं। वहीं “रिशु श्री टेंडर घोटाला” सरकार के लिए विपक्ष का सबसे बड़ा हथियार बनकर उभर रहा है।
उधर, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास खाली कराए जाने का मुद्दा भी सदन में गर्मी बढ़ाएगा। माना जा रहा है कि राजद इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताकर जोरदार विरोध करेगा।
इसके अलावा टीआरई-4 भर्ती, रोजगार और 1 करोड़ नौकरी के वादे पर भी सरकार विपक्ष के सीधे निशाने पर रहेगी।
सत्र का हर दिन लगभग तय करता दिख रहा है कि यह सिर्फ बजट सत्र नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति का “टकराव का ट्रेलर” होगा—जहां सवाल भी गरजेंगे और जवाब भी आग उगलेंगे।
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ब्यूरो हेड महुआ न्यूज़
बिहार /झारखण्ड