बगहा: बगहा व्यवहार न्यायालय से दो अलग-अलग गंभीर मामलों में कड़े फैसले सामने आए हैं। एक ओर प्रेम संबंध में महिला कर्मी की हत्या के मामले में दोषी मुंशी को आजीवन कारावास मिला, वहीं मानव तस्करी के चर्चित केस में भी स्पीडी ट्रायल के तहत महज़ 24 दिनों में सुनवाई पूरी कर आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। अदालत के इन फैसलों को कानून-व्यवस्था और त्वरित न्याय की दिशा में अहम माना जा रहा है।
पहले मामले में स्वाभिमान बटालियन, वाल्मीकिनगर में कार्यरत महिला कर्मी पूजा देवी की हत्या के दोषी अजय सिंह उर्फ कृष्णा कुमार सिंह को जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-चतुर्थ मानवेन्द्र मिश्रा की अदालत ने आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर छह माह अतिरिक्त कठोर कारावास का प्रावधान रखा गया है। अदालत में पेश पोस्टमार्टम व फॉरेंसिक रिपोर्ट से यह स्पष्ट हुआ कि मृतका की हत्या गला दबाकर की गई थी और बाद में शव को पानी में फेंककर घटना को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई। मोबाइल टावर लोकेशन, सीडीआर, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और गवाहों के बयान इस मामले में निर्णायक साबित हुए।
दूसरे मामले में नौरंगिया थाना क्षेत्र से तीन नाबालिग बच्चियों के अपहरण और मानव तस्करी के आरोप में पश्चिम बंगाल निवासी नियोती भुइयाँ और नागेश भुइयाँ को अदालत ने दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोनों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस मामले की खास बात यह रही कि स्पीडी ट्रायल के तहत महज 24 दिनों में सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया गया, जो बिहार में इस तरह के मामलों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
अभियोजन पक्ष की ओर से सिविल कोर्ट बगहा के एपीपी जितेंद्र भारती ने दोनों मामलों में प्रभावी पैरवी की। मानव तस्करी केस में उनकी भूमिका को देखते हुए बिहार के महाधिवक्ता द्वारा उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया गया है।
अदालत ने अपने फैसलों में स्पष्ट किया कि गंभीर अपराधों में कठोर सजा ही समाज में कानून का भय बनाए रख सकती है। इन दोनों फैसलों के बाद यह संदेश गया है कि अपराध चाहे किसी भी प्रकृति का हो, न्याय प्रक्रिया तेज और सख्त हो सकती है।
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