शेखपुरा: राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती समारोह पखवाड़ा के तीसरे दिन पी.एम. श्री +2 उच्च विद्यालय, बरबीघा में साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दिनकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई।
स्काउट और एनसीसी कैडेट्स ने दिनकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक संजय कुमार और अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। आगत अतिथियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया।
मंच से गूंजी दिनकर की कविताएं
कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने राष्ट्रकवि दिनकर की रचनाओं का पाठ किया। अपराजिता, अदिति, वैशाली, गोलू, सरगम राज और रागिनी राज समेत कई विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुति दी।
दिनकर की कविताओं के उत्कृष्ट पाठ के लिए छात्राओं अपराजिता, अदिति और वैशाली को पुरस्कृत किया गया।
राजकीय शिक्षक सम्मान प्राप्त शिक्षक एवं कवि आचार्य गोपाल ने स्वरचित कविता के साथ दिनकर की रचनाओं का पाठ किया। उन्होंने ‘संगिनी जी भर गा न सका मैं’ और ‘कृष्ण की चेतावनी’ का पाठ कर कार्यक्रम में साहित्यिक रंग भर दिया।
‘दिनकर के आदर्शों से प्रेरणा लें’
प्रभारी प्रधानाध्यापक संजय कुमार ने कहा कि दिनकर की आत्मा इस विद्यालय में बसती है और सभी को प्रेरणा देती रहती है। उन्होंने विद्यार्थियों से दिनकर के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।
जितेंद्र झा ने कहा कि दिनकर ने जीवन की कठिन परिस्थितियों के बीच अपनी शिक्षा पूरी की और उनका जीवन सभी के लिए आदर्श है। उन्होंने विद्यार्थियों से दिनकर के संघर्ष से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने की अपील की।
कृष्ण कुमार शर्मा ने कहा कि दिनकर जयंती पूरे देश में मनाई जा रही है। समिति लगातार विभिन्न स्थानों पर जाकर लोगों और विद्यार्थियों को दिनकर की रचनाओं से परिचित करा रही है।
‘अभ्यास से दूर होता है मंच का डर’
रामनाथ सिंह ने विद्यार्थियों से कहा कि मंच पर बोलने का डर नियमित अभ्यास से दूर किया जा सकता है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके गांव के बच्चे भी पहले मंच पर बोलने से डरते थे, लेकिन लगातार अभ्यास के बाद अब छोटे बच्चे भी आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखते हैं।
उन्होंने कहा कि दिनकर का जीवन और उनकी कविताएं दोनों ही विद्यार्थियों के लिए सीखने और प्रेरणा लेने योग्य हैं।
दिनकर की रचनाओं में संघर्ष, युद्ध और शांति का संदेश
समिति के विशंभर सिंह ने कहा कि दिनकर की रचनाओं ने सामाजिक संघर्ष और जनभावनाओं को नई अभिव्यक्ति दी। उन्होंने दिनकर की प्रमुख कृतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘रश्मिरथी’ में जाति व्यवस्था और सामाजिक प्रश्नों, जबकि ‘कुरुक्षेत्र’ में युद्ध और शांति जैसे विषयों को प्रभावी ढंग से उठाया गया है। उन्होंने ‘संस्कृति के चार अध्याय’ को भी दिनकर की महत्वपूर्ण और कालजयी रचनाओं में बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी प्रधानाध्यापक संजय कुमार ने की। स्वागत भाषण वरिष्ठ शिक्षक राजीव कुमार ने दिया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन शिक्षक एवं साहित्यकार डॉ. सुखेंदु कुमार ने किया। मंच संचालन आचार्य गोपाल ने किया।
इस अवसर पर राष्ट्रकवि दिनकर स्मृति विकास समिति के विशंभर सिंह, कृष्ण कुमार शर्मा, रामनाथ सिंह, जितेंद्र कुमार, ए.के. मनीष, गौरव कुमार समेत विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
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