मुजफ्फरपुर: शराब तस्करी के लिए तस्कर किस हद तक जुगाड़ लगा सकते हैं, इसका एक हैरान करने वाला मामला मुजफ्फरपुर में सामने आया है। यहां ई-ऑटो में तीन बोरियों के भीतर ऊपर से नोटबुक के बंडल दिखाई दे रहे थे, लेकिन जब उत्पाद विभाग की टीम ने गहराई से जांच की तो नोटबुक के बीच छिपी शराब की बड़ी खेप सामने आ गई।
मामला भीखनपुर इलाके का है। उत्पाद विभाग को सूचना मिली थी कि ई-ऑटो के जरिए शराब की खेप पहुंचाई जा रही है। इसके बाद इंस्पेक्टर प्रकाश कुमार राम के निर्देश पर एसआई राजा जन्मेजय के नेतृत्व में टीम ने संदिग्ध ई-ऑटो को रोककर तलाशी शुरू की।
नोटबुक खोली तो खुल गया पूरा खेल
ऑटो में तीन बोरियां मिलीं। पहली नजर में इनमें नोटबुक के बंडल नजर आ रहे थे। लेकिन पुलिस को शराब की खेप आने की सूचना पहले से थी, इसलिए सामान्य तलाशी के बजाय बोरियों की बारीकी से जांच की गई।
जांच के दौरान करीब 18 बंडलों की नोटबुक के बीच का हिस्सा काटकर शराब की बोतलें छिपाने की बात सामने आई। यानी बाहर से बोरी में नोटबुक, लेकिन अंदर शराब की खेप!
तलाशी में कुल 360 शराब की बोतलें बरामद की गईं।
एक हजार रुपये के लिए बना ‘कैरियर’!
कार्रवाई के दौरान उत्पाद विभाग ने ई-ऑटो चालक मो. सद्दाम अंसारी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसके द्वारा पुलिस को बताया गया कि शराब की खेप उसे प्रिंस नाम के व्यक्ति ने दी थी।
आरोप है कि एक ट्रिप में शराब पहुंचाने के बदले चालक को 1,000 रुपये मिलने थे। चालक ने खुद को इस नेटवर्क में नया बताया और शराब कहां से आई तथा किसे पहुंचाई जानी थी, इसकी जानकारी होने से इनकार किया।
अब ‘प्रिंस’ की तलाश
360 बोतलों की बरामदगी के बाद उत्पाद विभाग की जांच अब सिर्फ ऑटो चालक तक सीमित नहीं है। पुलिस उस प्रिंस तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जिसका नाम पूछताछ में सामने आया है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि शराब की खेप कहां से आई थी, इसे मुजफ्फरपुर में किसे सौंपा जाना था और क्या इसके पीछे कोई बड़ा तस्करी नेटवर्क सक्रिय है।
उत्पाद इंस्पेक्टर प्रकाश कुमार राम के मुताबिक, तस्कर लगातार शराब छिपाने के नए तरीके अपना रहे हैं। इस मामले में भी नोटबुक के बीच जगह बनाकर बोतलें छिपाई गई थीं, लेकिन पहले से मिली सूचना के कारण टीम ने गहन तलाशी लेकर खेप बरामद कर ली।
ऊपर पढ़ाई का सामान, नीचे शराब का खेल!
मुजफ्फरपुर के इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यही है कि नोटबुक के बंडलों को ही शराब छिपाने का जरिया बना दिया गया। बाहर से देखने पर सामान सामान्य लग रहा था, लेकिन जांच होते ही पूरा जुगाड़ सामने आ गया।
अब सवाल है—360 बोतलें लेकर जा रहा ई-ऑटो सिर्फ एक डिलीवरी थी या इसके पीछे शराब तस्करी का कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है? जांच पूरी होने के बाद तस्वीर और साफ होगी।
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