मधुबनी: केंद्रीय विद्यालय मधुबनी और झंझारपुर में संविदा शिक्षक पदों पर चयन के लिए आयोजित वॉक-इन इंटरव्यू मंगलवार को व्यवस्था की पोल खोलता नजर आया। प्राथमिक शिक्षक, कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर, म्यूजिक कोच और बाल वाटिका शिक्षक के पदों के लिए आयोजित इंटरव्यू में इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पहुंच गए कि जवाहर नवोदय विद्यालय परिसर के बाहर अफरातफरी की स्थिति बन गई। भीड़ का दबाव इतना बढ़ा कि मुख्य सड़क पर जाम लग गया और घंटों आवागमन प्रभावित रहा।
नौकरी के चंद पद, अभ्यर्थियों का सैलाब
वॉक-इन इंटरव्यू में मधुबनी के अलावा आसपास के कई जिलों से अभ्यर्थी पहुंचे थे। नौकरी की तलाश में हजारों युवाओं के पहुंचने से परिसर में भीड़ बेकाबू होती नजर आई। अभ्यर्थियों का आरोप है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई थी, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया अव्यवस्था की भेंट चढ़ गई।
विज्ञापन के अनुसार रजिस्ट्रेशन के बाद प्रमाणपत्रों की जांच और इंटरव्यू की प्रक्रिया होनी थी। लेकिन मौके पर उमड़ी भारी भीड़ ने पूरी व्यवस्था को चुनौती दे दी।
फॉर्म लिया, लेकिन रिसीविंग नहीं दी—अभ्यर्थियों का आरोप
कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि उनसे आवेदन फॉर्म तो ले लिया गया, लेकिन जमा किए गए फॉर्म की कोई रिसीविंग नहीं दी गई। उन्हें आगे की जानकारी के लिए KVS पोर्टल देखने की बात कही गई।
अभ्यर्थियों का सवाल है कि जब आवेदन जमा होने का कोई प्रमाण ही नहीं दिया गया तो चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित होगी?
सड़क पर उतरी बेरोजगारी की भीड़!
जवाहर नवोदय विद्यालय परिसर के बाहर उमड़ी भीड़ ने स्थानीय प्रशासन और आयोजकों की तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए। मुख्य सड़क पर अभ्यर्थियों और वाहनों की भारी संख्या के कारण जाम लग गया। कई घंटे तक यातायात प्रभावित रहा और स्थानीय लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मौके पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने का आरोप लगाया गया। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब हजारों लोगों के पहुंचने की संभावना थी तो पहले से पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
चयन प्रक्रिया पर भ्रष्टाचार के आरोप, लेकिन प्रमाण सामने नहीं
व्यवस्था से नाराज कुछ अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की आशंका भी जताई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अभ्यर्थियों की मांग है कि पूरी चयन प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से कराई जाए और आवेदन से लेकर इंटरव्यू तथा अंतिम चयन तक प्रत्येक चरण की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जाए।
संविदा नौकरी के लिए उमड़ा सैलाब, रोजगार के दावों पर सवाल
यह वॉक-इन इंटरव्यू एक और तस्वीर सामने लाता है—संविदा आधार पर सीमित पदों के लिए भी बड़ी संख्या में युवा नौकरी की कतार में खड़े हैं। शिक्षक पदों की भर्ती के लिए उमड़ी भीड़ ने रोजगार की वास्तविक स्थिति को लेकर बहस छेड़ दी है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि रोजगार के अवसर सीमित हैं और सरकारी या संविदा नियुक्तियों की प्रक्रिया में भीड़ लगातार बढ़ रही है। ऐसे में केवल रोजगार उपलब्ध कराने के दावों से युवाओं की समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि पर्याप्त और पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया की जरूरत है।
फिलहाल इंटरव्यू में हुई अव्यवस्था को लेकर अभ्यर्थियों में नाराजगी है। अब देखना होगा कि केंद्रीय विद्यालय प्रशासन इस भारी भीड़, आवेदन प्रक्रिया और अभ्यर्थियों की शिकायतों पर क्या स्पष्टीकरण देता है।
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