पटना/नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों का मामला अब संसदीय कार्रवाई के दायरे में पहुंच गया है। लोकसभा सचिवालय ने राहुल गांधी को नोटिस जारी कर 28 अगस्त 2026 तक अपना पक्ष और जवाब प्रस्तुत करने को कहा है।
यह नोटिस भाजपा सांसद डॉ. संजय जायसवाल और अनुराग सिंह ठाकुर द्वारा दिए गए विशेषाधिकार हनन नोटिसों के आधार पर भेजा गया है। दोनों सांसदों ने राहुल गांधी पर सदन की गरिमा और संसदीय मर्यादाओं का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर हुई चर्चा के दौरान शुरू हुआ। बहस के दौरान राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखी टिप्पणी की थी।
भाजपा सांसदों ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की कुछ टिप्पणियां व्यक्तिगत, अपमानजनक और असंसदीय थीं। इसके बाद संसद में इस मुद्दे को लेकर विरोध दर्ज कराया गया और विशेषाधिकार हनन का नोटिस दायर किया गया।
संजय जायसवाल ने उठाया था पहला सवाल
भाजपा सांसद और लोकसभा की प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने 29 जुलाई को लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी।
उन्होंने कहा था कि विपक्ष को सरकार की नीतियों की आलोचना करने का पूरा अधिकार है, लेकिन किसी व्यक्ति के खिलाफ अपमानजनक भाषा और व्यक्तिगत आरोप संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं हैं।
जायसवाल ने लोकसभा अध्यक्ष से संबंधित टिप्पणियों को कार्यवाही से हटाने और राहुल गांधी को चेतावनी देने की मांग की थी।
अनुराग ठाकुर ने भी दिया विशेषाधिकार हनन नोटिस
भाजपा सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने 30 जुलाई को राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का अलग नोटिस दाखिल किया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ असंसदीय भाषा का प्रयोग किया और ऐसे आरोप लगाए जो संसदीय मर्यादा के खिलाफ हैं।
किन नियमों का दिया गया हवाला?
डॉ. संजय जायसवाल ने अपने नोटिस में लोकसभा के कई नियमों का उल्लेख किया है।
- नियम 352 : किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोपात्मक या मानहानिकारक टिप्पणी पर निर्धारित प्रक्रिया का पालन आवश्यक।
- नियम 353 : किसी व्यक्ति के आचरण का उल्लेख तभी किया जा सकता है, जब वह चर्चा के विषय से संबंधित हो।
- नियम 380 : अध्यक्ष को असंसदीय, अशोभनीय या मानहानिकारक शब्दों को कार्यवाही से हटाने का अधिकार।
- नियम 373, 374 और 374A : सदन में अनुशासनहीनता या व्यवधान की स्थिति में कार्रवाई का प्रावधान।
लोकसभा सचिवालय ने मांगा जवाब
लोकसभा सचिवालय की विशेषाधिकार शाखा ने 14 अगस्त को राहुल गांधी को दोनों नोटिसों की प्रतियां भेजीं। पत्र में कहा गया है कि मामला लोकसभा अध्यक्ष के विचाराधीन है और राहुल गांधी से 28 अगस्त 2026 तक लिखित जवाब मांगा गया है।
सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि राहुल गांधी का पक्ष प्राप्त होने के बाद उसे लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष रखा जाएगा, जिसके आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।
आगे क्या हो सकता है?
संसदीय नियमों के अनुसार यदि किसी सदस्य की टिप्पणी असंसदीय या आपत्तिजनक पाई जाती है, तो उसे सदन की कार्यवाही से हटाया जा सकता है। परिस्थितियों के आधार पर अन्य संसदीय कार्रवाई भी संभव है।
हालांकि, अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष के विवेक पर निर्भर करेगा। अब सबकी नजर राहुल गांधी के जवाब और उसके बाद होने वाली संसदीय कार्रवाई पर टिकी है।
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