रोहतास: जीविका के 20 साल पूरे होने पर रोहतास में आयोजित ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम में शुक्रवार को महिला सशक्तीकरण की खूब बातें हुईं। मंच से बताया गया कि जीविका दीदियां अब आत्मनिर्भर हैं, परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं और समाज में बदलाव की नई कहानी लिख रही हैं। लेकिन कार्यक्रम स्थल के बाहर की तस्वीर कुछ अलग ही कहानी सुनाती नजर आई।
महिलाओं को भोजन के लिए ऐसी मशक्कत करनी पड़ी कि कुछ देर के लिए लगा मानो कार्यक्रम का अगला सत्र ‘भोजन खोजो अभियान’ हो। किसी के हाथ में पत्तल थी तो कोई भोजन की तलाश में इधर-उधर घूमती नजर आई। किसी को सब्जी मिली तो किसी को बाकी भोजन का इंतजार करना पड़ा। पानी के लिए भी कई महिलाएं परेशान दिखीं।
भाषण में आत्मनिर्भरता, भोजन में ‘खुद खोजो और पाओ’
पायलट बाबा धाम स्थित वीर कुंवर सिंह सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मंच से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की उपलब्धियां गिनाई गईं। लेकिन बाहर हालात ऐसे दिखे कि भोजन पाने के मामले में भी महिलाओं को अपनी ‘स्वावलंबन शक्ति’ का इस्तेमाल करना पड़ा।
भीड़ अधिक होने के कारण भोजन वितरण के दौरान अव्यवस्था जैसी स्थिति दिखाई दी। गर्मी और भीड़ के बीच पानी के लिए भी महिलाओं को इंतजार करना पड़ा।
सभागार फुल, बाहर भी ‘फुल हाउस’
आयोजकों के अनुसार करीब तीन हजार जीविका दीदियां कार्यक्रम में पहुंचीं। सभागार में जगह कम पड़ने पर कई महिलाएं बाहर बैठकर कार्यक्रम सुनती रहीं।
अंदर मंच से महिला सशक्तीकरण की चर्चा चलती रही और बाहर व्यवस्था का अपना ही ‘प्रैक्टिकल डेमो’ नजर आया। सवाल यही उठा कि जब तीन हजार महिलाओं के पहुंचने की जानकारी थी, तो भोजन और पानी के इंतजाम में इतनी परेशानी क्यों हुई?
जीविका दीदियों ने मांगा पहचान पत्र, व्यवस्था ने दिया ‘यादगार अनुभव’
कार्यक्रम में जीविका दीदियों ने आधिकारिक पहचान पत्र और प्रमाणपत्र की मांग भी उठाई। मंत्री अशोक चौधरी ने इस दिशा में काम किए जाने की बात कही।
कुल मिलाकर कार्यक्रम का संदेश था—महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाइए। लेकिन कार्यक्रम की तस्वीरों ने एक अलग ही संदेश दे दिया—भोजन और पानी के लिए भी व्यवस्था ऐसी हो कि कोई किसी पर निर्भर न रहे!
मंच से महिला सशक्तीकरण का संदेश और मैदान में भोजन-पानी की जद्दोजहद ने कार्यक्रम को चर्चा में ला दिया है। अब सवाल भाषण का नहीं, व्यवस्था का है—आखिर जीविका दीदियों के ‘नीतीश संवाद’ में भोजन-पानी का संवाद इतना लंबा क्यों चला?
ये खबर भी पढ़े: तटबंध टूटा तो गिरी अफसरों पर गाज, गोपालगंज में तीन अभियंता हटाए गए!