पटना: भारत के लिए भविष्य के ओलंपिक चैंपियन तैयार करने की दिशा में बिहार ने बड़ा संकल्प लिया है। वर्ष 2032 ओलंपिक खेलों को लक्ष्य बनाकर बिहार राज्य खेल प्राधिकरण ने राज्य में खेल प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की है।
इस योजना के तहत राज्यभर में वैज्ञानिक तरीके से प्रतिभा खोज अभियान चलाया जाएगा, जिसके माध्यम से कम उम्र की खेल प्रतिभाओं को चिन्हित कर उन्हें लंबी अवधि का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

12 से 15 वर्ष के खिलाड़ियों पर फोकस
बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवीन्द्रण शंकरण ने बताया कि प्राधिकरण ने पूर्व ओलंपियन, अर्जुन पुरस्कार और द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित संजीव सिंह को 24 जुलाई 2026 को बिहार में राज्यव्यापी प्रतिभा खोज अभियान का नेतृत्व करने के लिए आमंत्रित किया।
इस अभियान के तहत राज्य के विभिन्न जिलों से 12 से 15 वर्ष आयु वर्ग के 20 सर्वश्रेष्ठ बालक और 20 सर्वश्रेष्ठ बालिकाओं का चयन किया गया है। चयनित खिलाड़ियों के लिए दीर्घकालिक, वैज्ञानिक और व्यवस्थित प्रशिक्षण व्यवस्था तैयार की जाएगी, ताकि वे भविष्य में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बिहार और देश का प्रतिनिधित्व कर सकें।

जमीनी स्तर से तैयार होंगे ओलंपिक विजेता
पूर्व ओलंपियन संजीव सिंह ने कहा कि बिहार की यह पहल बेहद प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि खेल प्रतिभाओं को छोटी उम्र में पहचान कर उन्हें सही प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराना ही भविष्य के बड़े खिलाड़ियों को तैयार करने की कुंजी है।
उन्होंने बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह और महानिदेशक रवीन्द्रण शंकरण के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि राज्य अब जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को तलाश कर उन्हें विश्वस्तरीय मंच तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रहा है।
वैज्ञानिक प्रशिक्षण से बदलेगा खेल का भविष्य
रवीन्द्रण शंकरण ने कहा कि विश्वस्तरीय खिलाड़ी केवल प्रतिभा के दम पर नहीं बनते, बल्कि इसके लिए स्पष्ट लक्ष्य, लंबे समय की योजना, निरंतर निवेश और वैज्ञानिक प्रशिक्षण जरूरी है।
उन्होंने कहा कि बिहार राज्य खेल प्राधिकरण इसी रणनीति के तहत ओलंपिक 2032 की तैयारी को नई दिशा दे रहा है। कम उम्र में प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें बेहतर सुविधाएं और प्रशिक्षण देकर बिहार भविष्य के ओलंपिक चैंपियन तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
यह पहल न सिर्फ बिहार के खेल क्षेत्र को नई पहचान दे सकती है, बल्कि आने वाले वर्षों में देश को कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी दे सकती है।
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