बेतिया: गंडक नदी की बाढ़ ने नौतन प्रखंड क्षेत्र के कई परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। घरों में पानी घुसने के बाद बड़ी संख्या में परिवार सुरक्षित ठिकाने की तलाश में चंपारण तटबंध और बांधों पर शरण लेने को मजबूर हैं। इसी बीच संकट में घिरे परिवारों की मदद के लिए किन्नर समाज ने आगे बढ़कर राहत सामग्री वितरित की।
खुशी किन्नर, कृष्णा किन्नर और पंडिताइन किन्नर बनकटवा और मंगलपुर बांध पर पहुंचीं और वहां रह रहे बाढ़ पीड़ित परिवारों के बीच राहत सामग्री बांटी। उन्होंने प्रभावित लोगों से उनकी समस्याएं भी जानीं और जरूरत के मुताबिक सहायता उपलब्ध कराई।

खुले आसमान के नीचे गुजर रही जिंदगी
बाढ़ के कारण कई परिवारों को घर-बार छोड़कर बांधों पर अस्थायी तंबुओं में रहने को मजबूर होना पड़ा है। भोजन, पानी और रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर लोगों की परेशानियां बनी हुई हैं। ऐसे में राहत सामग्री मिलने से पीड़ित परिवारों को तत्काल मदद मिली।
राहत बांटने पहुंचीं किन्नर समाज की सदस्यों ने कहा कि आपदा के समय इंसान की पहचान नहीं, उसकी जरूरत देखी जानी चाहिए। जरूरतमंद की मदद करना ही सबसे बड़ी मानवता है। उन्होंने कहा कि अपनी क्षमता के अनुसार बाढ़ पीड़ितों की मदद आगे भी जारी रखेंगी।

‘जब जरूरत थी, तब हम पहुंचे’
राहत सामग्री मिलने पर बाढ़ पीड़ित परिवारों ने किन्नर समाज के प्रति आभार जताया। स्थानीय लोगों का कहना है कि संकट के समय इस तरह की पहल से प्रभावित परिवारों को हौसला मिलता है।
वहीं, स्थानीय स्तर पर राहत कार्यों में जनप्रतिनिधियों की सक्रियता को लेकर भी लोगों के बीच चर्चा है। बाढ़ के बीच बांधों पर रह रहे परिवारों की जरूरतें लगातार बनी हुई हैं और उन्हें नियमित राहत की आवश्यकता है।
नौतन में आई बाढ़ ने जहां लोगों के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं, वहीं किन्नर समाज की यह पहल सामाजिक सहयोग की मिसाल के तौर पर सामने आई है। संकट की घड़ी में राहत सामग्री लेकर बांध पर पहुंचना प्रभावित परिवारों के लिए मदद के साथ-साथ यह संदेश भी दे गया कि आपदा में इंसानियत सबसे बड़ी पहचान है।
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बेतिया से अजय शर्मा की रिपोर्ट…