रांची: रेलवे यात्रियों की सुरक्षा, अपराध नियंत्रण और रेलवे परिसरों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए आरपीएफ रांची को प्रतिष्ठित ‘Security Shield’ अवार्ड से सम्मानित किया गया है। दक्षिण पूर्व रेलवे के प्रधान कार्यालय, GRC कोलकाता में आयोजित समारोह में दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक ने यह सम्मान प्रदान किया।
यह पुरस्कार रांची मंडल में डीएससी/आरपीएफ रांची के नेतृत्व में किए गए लगातार सुरक्षा प्रयासों की सराहना के तौर पर दिया गया। यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए संदिग्ध और असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई, रेलवे परिसरों में सतर्क गश्त, अवैध गतिविधियों पर रोक तथा रेलवे संपत्ति की सुरक्षा जैसे कार्यों में आरपीएफ की सक्रिय भूमिका रही है।
बच्चों से लेकर तस्करी तक, कई मोर्चों पर चला अभियान
पिछले एक वर्ष में आरपीएफ रांची ने यात्री सुरक्षा को केंद्र में रखते हुए कई विशेष अभियानों का संचालन किया। ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ के तहत गुमशुदा और जरूरतमंद बच्चों को सुरक्षित बरामद कर उनके परिजनों अथवा संबंधित बाल कल्याण समिति तक पहुंचाया गया। वहीं ‘ऑपरेशन आहट’ के जरिए मानव तस्करी के खिलाफ कार्रवाई की गई।
इसके अलावा ‘ऑपरेशन नॉर्कोस’ और ‘ऑपरेशन सतर्क’ के तहत मादक पदार्थों, अवैध शराब, तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों पर लगातार कार्रवाई की गई। रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में निगरानी बढ़ाने के साथ संदिग्ध गतिविधियों पर भी आरपीएफ की नजर रही।
सख्ती के साथ संवेदनशीलता भी बनी पहचान
आरपीएफ जवानों की भूमिका केवल अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं रही। आपात स्थिति में यात्रियों की मदद, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को सहायता, बच्चों की सुरक्षा तथा जरूरतमंद यात्रियों को तत्काल मानवीय सहयोग उपलब्ध कराने में भी बल के जवान सक्रिय रहे।
यही वजह है कि ‘Security Shield’ को महज एक पुरस्कार के बजाय आरपीएफ रांची की टीम की अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और सेवा भावना की पहचान के रूप में देखा जा रहा है।
24 घंटे सुरक्षा की जिम्मेदारी
सम्मान समारोह में दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक के अलावा रेलवे और सुरक्षा विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सम्मान मिलने के बाद रांची मंडल में आरपीएफ की टीम के बीच उत्साह का माहौल है।
यह उपलब्धि आरपीएफ रांची के अधिकारियों और जवानों के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि रेलवे में यात्रियों की सुरक्षित और निर्बाध यात्रा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी चौबीसों घंटे बनी रहती है। ‘Security Shield’ ने टीम के इन प्रयासों को संस्थागत स्तर पर पहचान दी है और आने वाले दिनों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जिम्मेदारी भी बढ़ा दी है।
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