कोडरमा: कभी घर की आर्थिक परेशानियों से जूझने वाली महिलाएं आज अपने पैरों पर खड़ी होकर परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। कोडरमा जिले में मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना कई महिलाओं के लिए सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि नई उम्मीद और आत्मविश्वास की वजह बन गई है।
योजना से मिली सहायता राशि का सही इस्तेमाल करते हुए जिले की कई महिलाओं ने छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू किए और आज आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं। किसी ने कपड़ों की दुकान शुरू की, तो किसी ने किराना और राशन दुकान खोलकर अपनी आमदनी का जरिया बनाया। वहीं कुछ महिलाओं ने घरेलू उत्पाद तैयार कर अपनी अलग पहचान बनाई है।
इन महिलाओं की कहानी बताती है कि अगर हौसला हो और सही समय पर सहयोग मिल जाए, तो छोटे प्रयास भी बड़ी सफलता में बदल सकते हैं।
रीना देवी (चंदवारा) : कपड़ों की दुकान से बदली जिंदगी
चंदवारा प्रखंड की रहने वाली रीना देवी के लिए जिंदगी आसान नहीं थी। आर्थिक परेशानियों के कारण उनके पास रोजगार का कोई स्थायी साधन नहीं था। मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना से मिली राशि को उन्होंने खर्च करने के बजाय अपने भविष्य को बेहतर बनाने में लगाया और कपड़ों की दुकान शुरू की।
धीरे-धीरे दुकान में ग्राहकों की संख्या बढ़ी और आज रीना देवी अपने परिवार की आर्थिक मदद कर रही हैं।
रीना देवी ने कहा, पहले मेरे पास अपनी कोई आमदनी नहीं थी। योजना से मिली सहायता ने मुझे आगे बढ़ने का मौका दिया। मैंने इस राशि का उपयोग अपने काम को शुरू करने में किया। आज मुझे खुशी है कि मैं अपने परिवार का सहारा बन पा रही हूं।
गायत्री देवी (चंदवारा) : किराना दुकान बनी सहारा
चंदवारा की गायत्री देवी ने योजना से मिली आर्थिक सहायता का उपयोग किराना दुकान शुरू करने में किया। पहले घर की जरूरतों को पूरा करना चुनौती थी, लेकिन अब दुकान से नियमित आय हो रही है।
उनका कहना है कि योजना ने उन्हें खुद पर विश्वास करना सिखाया।
गायत्री देवी ने कहा, पहले छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी परेशानी होती थी। अब मेरी अपनी दुकान है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है और मुझे आत्मनिर्भर बनने का मौका मिला है।
पूजा देवी (जयनगर) : रोजगार के साथ मिली नई पहचान
जयनगर की पूजा देवी के पास पहले रोजगार का कोई स्थायी साधन नहीं था। मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना से मिली सहायता राशि से उन्होंने राशन दुकान शुरू की।
आज वह अपने व्यवसाय को संभालते हुए परिवार की जिम्मेदारियों में योगदान दे रही हैं।
पूजा देवी ने कहा, इस योजना ने मुझे सिर्फ आर्थिक मदद नहीं दी, बल्कि अपनी पहचान बनाने का अवसर दिया। अब मैं खुद काम करती हूं और अपने परिवार के लिए कुछ कर पा रही हूं।
सीमा देवी (जयनगर) : छोटे व्यवसाय को मिला विस्तार
जयनगर की सीमा देवी पहले छोटी दुकान चलाती थीं, लेकिन पूंजी की कमी के कारण उनका व्यवसाय सीमित था। योजना से मिली सहायता राशि से उन्होंने अपने कारोबार में निवेश किया।
आज उनकी दुकान पहले से बेहतर चल रही है और आमदनी में भी बढ़ोतरी हुई है।
सीमा देवी ने कहा, पहले पैसे की कमी के कारण काम को आगे नहीं बढ़ा पा रही थी। योजना से मिली सहायता से मुझे अपने व्यवसाय को बढ़ाने का मौका मिला। अब मेरा आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
नंदनी कुमारी (मरकच्चो) : घरेलू काम से बनाया रोजगार
मरकच्चो की नंदनी कुमारी ने मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना की सहायता से साबुन निर्माण का काम शुरू किया। घर से शुरू हुआ यह प्रयास अब उनकी आय का जरिया बन गया है।
वह स्थानीय स्तर पर उत्पाद तैयार कर रही हैं और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
नंदनी कुमारी ने कहा, पहले सोचती थी कि घर से कुछ काम शुरू करूं, लेकिन आर्थिक परेशानी थी। योजना की मदद से मैंने शुरुआत की। अब मुझे भरोसा है कि मैं अपने काम को और आगे बढ़ा सकती हूं।
टुनी कुमारी (मरकच्चो) : मेहनत से बढ़ाया कारोबार
मरकच्चो की टुनी कुमारी ने योजना से मिली राशि को अपनी मेहनत से जोड़कर राशन दुकान की शुरुआत की। आज उनका व्यवसाय धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और परिवार को आर्थिक मजबूती मिल रही है।
टुनी कुमारी ने कहा, इस योजना ने मुझे शुरुआत करने की ताकत दी। अब मैं अपने पैरों पर खड़ी हूं और आगे अपने व्यवसाय को और बढ़ाने का सपना देख रही हूं।
महिलाओं की बदलती तस्वीर
कोडरमा में मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना के जरिए महिलाओं की जिंदगी में बदलाव की यह कहानी अब कई परिवारों तक पहुंच रही है। आर्थिक सहायता से शुरू हुई यह पहल अब आत्मविश्वास, सम्मान और आत्मनिर्भरता का माध्यम बन चुकी है।
इन महिलाओं की सफलता यह संदेश देती है कि अवसर मिलने पर महिलाएं न सिर्फ अपनी जिंदगी बदल सकती हैं, बल्कि परिवार और समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
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