पटना: उत्तर बिहार को जोड़ने वाले ऐतिहासिक राजेंद्र रेल-सह-सड़क पुल के समानांतर बने नए रेल पुल पर अब ट्रेनों की आवाजाही शुरू होने वाली है। मोकामा के पास गंगा नदी पर बने इस अत्याधुनिक दोहरी रेल लाइन वाले पुल से परिचालन शुरू करने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गई है। रेलवे ने इसके लिए 21 सितंबर 2026 से नॉन इंटरलॉकिंग (एनआई) कार्य शुरू करने का निर्णय लिया है।
रेलवे के अनुसार, एनआई कार्य पूरा होने के बाद 4 अक्टूबर 2026 से नए पुल के माध्यम से ट्रेनों का परिचालन शुरू किया जाएगा। इस दौरान दानापुर और सोनपुर मंडल के कई रेल खंडों में तकनीकी कार्य किए जाएंगे, जिसके कारण बड़ी संख्या में ट्रेनों के परिचालन में बदलाव किया गया है।
रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र ने बताया कि नए पुल को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने के लिए राजेंद्र पुल, हाथीदह जंक्शन, टाल जंक्शन, रामपुर डुमरा और दिनकर ग्राम सिमरिया-बरौनी जंक्शन के बीच जरूरी कनेक्शन का काम किया जाएगा।
15 दिनों तक ट्रेनों पर असर
एनआई कार्य के दौरान कई ट्रेनों को रद्द किया जाएगा, जबकि कई ट्रेनों का मार्ग बदला जाएगा। रेलवे के मुताबिक, इस अवधि में करीब 384 ट्रेनों को परिवर्तित मार्ग से चलाया जाएगा। वहीं, 56 ट्रेनों का आंशिक समापन और 67 ट्रेनों का आंशिक प्रारंभ किया जाएगा।
20 सितंबर से 4 अक्टूबर तक अलग-अलग दिनों में दर्जनों ट्रेनों का परिचालन प्रभावित रहेगा। सबसे ज्यादा असर 1, 2 और 3 अक्टूबर को देखने को मिलेगा, जब बड़ी संख्या में ट्रेनों को रद्द करने का निर्णय लिया गया है।
60 साल पुराने पुल का खत्म होगा दबाव
गौरतलब है कि मोकामा और बरौनी के बीच गंगा नदी पर बना मौजूदा राजेंद्र पुल वर्ष 1959 में तैयार हुआ था। करीब 1.9 किलोमीटर लंबे इस पुल पर वर्तमान में सिंगल रेल लाइन है। बढ़ते यातायात और तकनीकी सीमाओं के कारण इस पुल पर रेल लाइन का दोहरीकरण संभव नहीं था।
यात्रियों और माल परिवहन की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए वर्ष 2015-16 के रेल बजट में राजेंद्र पुल के समानांतर नए रेल पुल निर्माण को मंजूरी दी गई थी। इस परियोजना की अनुमानित लागत 1491.47 करोड़ रुपये रखी गई थी। प्रधानमंत्री द्वारा 12 मार्च 2016 को इस पुल का शिलान्यास किया गया था।
दोहरी रेल लाइन से बढ़ेगी बिहार की रफ्तार
नया रेल पुल वर्तमान पुल से करीब 50 मीटर की दूरी पर पटना की ओर बनाया गया है। इसकी मुख्य लंबाई करीब 1.9 किलोमीटर है, जबकि एप्रोच लाइन समेत परियोजना की कुल लंबाई करीब 14 किलोमीटर है।
इस परियोजना में गंगा नदी पर मुख्य पुल के अलावा 9 छोटे पुल, 2 सड़क ऊपरी पुल और 3 रेल ओवर रेल पुल का निर्माण भी किया गया है।
नए पुल के चालू होने से उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच रेल संपर्क और मजबूत होगा। मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों की गति बढ़ेगी तथा पुराने राजेंद्र पुल पर यातायात का दबाव भी कम होगा।
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