लखीसराय: सफलता पाने के लिए बड़े संसाधनों से ज्यादा जरूरी होती है मेहनत, लगन और खुद पर भरोसा। इसी सोच को सच साबित किया है लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा प्रखंड अंतर्गत अलीनगर चननियां गांव निवासी संदीप कुमार ने। सीमित संसाधनों के बीच घर पर रहकर सेल्फ स्टडी के दम पर संदीप ने देश की प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG-2026 में शानदार सफलता हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है।
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संदीप कुमार ने NEET UG-2026 में 99.46 परसेंटाइल प्राप्त किया है। उन्होंने कुल 720 अंकों में 598 अंक हासिल किए हैं। वहीं, उन्हें ऑल इंडिया रैंक 10605 मिली है। इसके अलावा OBC-NCL श्रेणी में उनकी कैटेगरी रैंक 4768 रही। उनकी इस उपलब्धि के बाद परिवार सहित पूरे गांव में खुशी का माहौल है।
संदीप कुमार अलीनगर चननियां निवासी अधिवक्ता जितेन्द्र कुमार यादव और बबीता देवी के पुत्र हैं। उनके दादा स्वर्गीय विदेशी यादव भूतपूर्व प्रधानाध्यापक रहे हैं। शिक्षा के प्रति परिवार के सकारात्मक माहौल और माता-पिता के सहयोग ने संदीप को अपने लक्ष्य तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संदीप ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ज्ञान स्थली, पटना (सीबीएसई) से पूरी की। इसके बाद उन्होंने 11वीं की पढ़ाई आर. लाल कॉलेज, लखीसराय से की। मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने के सपने के साथ उन्होंने NEET की तैयारी शुरू की।
खास बात यह रही कि संदीप ने तैयारी के लिए किसी बड़े कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया। उन्होंने घर पर रहकर अपनी पढ़ाई की रणनीति बनाई और नियमित अभ्यास के जरिए परीक्षा की तैयारी की। उन्होंने विषयों की गहरी समझ, समय प्रबंधन और लगातार मेहनत को अपनी सफलता का आधार बनाया।
संदीप ने बताया कि तैयारी के दौरान उन्होंने पाठ्यक्रम को समझकर पढ़ाई की और कमजोर विषयों पर विशेष ध्यान दिया। उनका मानना है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो सफलता जरूर मिलती है।
उन्होंने कहा कि आत्म-अनुशासन और नियमित पढ़ाई ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। संदीप की सफलता उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक स्थिति या संसाधनों की कमी के कारण बड़े सपने देखने से हिचकिचाते हैं।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की ओर से जारी स्कोर कार्ड में संदीप के शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि गांव और छोटे शहरों से निकलकर भी विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
संदीप की सफलता पर परिवार, ग्रामीणों और शुभचिंतकों ने खुशी जताते हुए उन्हें बधाई दी है। अब उनका लक्ष्य मेडिकल क्षेत्र में आगे बढ़कर डॉक्टर बनना और समाज की सेवा करना है।
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संदीप की कहानी यह संदेश देती है कि सफलता के लिए महंगी कोचिंग नहीं, बल्कि मजबूत इरादा, सही दिशा और लगातार मेहनत सबसे बड़ा हथियार है।
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