रामगढ़: रामगढ़ में प्रशासनिक सख्ती का असर अब दफ्तरों में भी साफ दिखने लगा है। उपायुक्त ऋतुराज ने सामाजिक सुरक्षा कार्यालय का औचक निरीक्षण कर सिस्टम की हकीकत पर सीधा फोकस किया। बिना पूर्व सूचना पहुंचे उपायुक्त ने पेंशन योजनाओं से लेकर लंबित फाइलों तक हर पहलू को बारीकी से परखा—और जहां कमी दिखी, वहीं तुरंत सख्त निर्देश भी दिए।
निरीक्षण के दौरान वृद्धावस्था पेंशन, सर्वजन पेंशन, विधवा और दिव्यांग पेंशन जैसी योजनाओं की स्थिति की समीक्षा की गई। सबसे ज्यादा जोर उन आवेदनों पर रहा, जो लंबे समय से लंबित पड़े हैं। उपायुक्त ने साफ कहा कि अब कोई भी फाइल बेवजह नहीं रुकेगी—हर लंबित मामले का प्राथमिकता के आधार पर जल्द निपटारा करना होगा।
कार्यालय के अंदर फाइलों के रख-रखाव, पंजी संधारण और कामकाज की व्यवस्था भी जांच के दायरे में रही। इस दौरान यह भी स्पष्ट निर्देश दिया गया कि दफ्तर में आने वाले हर लाभुक के साथ संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार हो, ताकि उन्हें बार-बार चक्कर न लगाना पड़े।
उपायुक्त ने यह भी दोहराया कि सामाजिक सुरक्षा योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका लाभ सही समय पर सही व्यक्ति तक पहुंचे—यही प्रशासन की असली जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जो लोग अब तक योजनाओं से वंचित हैं, उनकी पहचान कर उन्हें तुरंत जोड़ा जाए।
इस औचक निरीक्षण के बाद साफ संकेत मिल रहा है कि अब रामगढ़ में “फाइलों की धीमी रफ्तार” पर ब्रेक लगाने की तैयारी है। सवाल यही है—क्या ये सख्ती जमीन पर भी उतनी ही तेजी दिखा पाएगी, जितनी मीटिंग और निरीक्षण में नजर आई?
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