मुंगेर: सावन के पवित्र महीने में बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ते शिवभक्तों की आस्था इस बार कुछ अलग ही अंदाज में नजर आ रही है। मुंगेर के कच्ची कांवरिया पथ पर झारखंड के धनबाद से आई कांवड़ियों की एक टोली अपनी अनोखी और आकर्षक कांवड़ों को लेकर चर्चा में है।
किसी श्रद्धालु के कंधे पर 18 से 20 किलो वजनी डमरू के आकार की कांवड़ है, तो किसी ने अपनी कांवड़ पर शिवलिंग और बाबा बैद्यनाथ मंदिर की खूबसूरत प्रतिकृति बनाई है। इन कांवड़ों की कलात्मकता और भक्ति का संगम राहगीरों को रुककर देखने को मजबूर कर रहा है।
रास्ते में गुजरने वाले अन्य कांवरिये भी इन अनोखी कांवड़ों को देखकर ठहर जा रहे हैं, तस्वीरें ले रहे हैं और इस भक्ति के रंग में डूबते नजर आ रहे हैं। यह सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि भगवान भोलेनाथ के प्रति गहरी श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक बन चुका है।
धनबाद से आए कांवड़िया अजय विश्वकर्मा बताते हैं कि उनकी टोली में छह से अधिक सदस्य हैं और हर कोई अलग-अलग डिजाइन की कांवड़ लेकर बाबाधाम जा रहा है। उनका कहना है कि यह परंपरा वर्षों से जारी है और हर साल वे कुछ नया और खास करने की कोशिश करते हैं।
सावन के इस पवित्र सफर में जहां एक ओर आस्था की गूंज है, वहीं दूसरी ओर कांवड़ों की यह अनोखी झलक भक्ति को एक नया रंग दे रही है—जहां कला, श्रम और श्रद्धा एक साथ दिखाई दे रहे हैं।
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