रांची: राजधानी रांची में शुक्रवार को एक अलग तरह का विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। लद्दाख के वैज्ञानिक, शिक्षाविद और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक के समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ता सड़क पर उतरे और केंद्र सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका के सामने आयोजित इस धरने में कई सामाजिक संगठनों, छात्रों और बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद की।
धरने का नेतृत्व सामाजिक कार्यकर्ता देवी दयाल मुंडा ने किया। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक का आंदोलन सिर्फ किसी व्यक्ति का मुद्दा नहीं है, बल्कि पर्यावरण, शिक्षा और जनहित से जुड़े सवालों से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण आंदोलन हर नागरिक का अधिकार है और सरकार को जनभावनाओं को सुनते हुए संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।
‘सरकार को आंदोलन को गंभीरता से सुनना चाहिए’
प्रदर्शन में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता जावेद अख्तर ने कहा कि सोनम वांगचुक देश के जाने-माने वैज्ञानिक और शिक्षाविद हैं। अगर वह किसी मुद्दे को लेकर भूख हड़ताल जैसे कदम उठा रहे हैं तो सरकार को उनकी बातों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से बातचीत कर समाधान निकालने की मांग की। वहीं कुछ लोगों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग भी उठाई।
तख्तियों से गूंजी बापू वाटिका
धरने में शामिल लोगों ने पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा सुधार और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी बातें रखीं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लोकतंत्र में असहमति की आवाज को दबाने के बजाय उसे सम्मान दिया जाना चाहिए।
कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। अंत में प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपने की बात कही।