झारखंड: रांची से झारखंड की राजनीति में बड़ा उलटफेर सामने आया है, जहां राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग ने महागठबंधन की गणित बिगाड़ दी। दो सीटों पर हुए मुकाबले में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के बैजनाथ राम और एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी ने जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा।
चौंकाने वाली बात यह रही कि पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद महागठबंधन अपने ही विधायकों को एकजुट नहीं रख सका। कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को केवल 21 वोट मिले, जिनमें एक वोट अमान्य रहा। वहीं, मात्र 24 विधायकों के समर्थन वाली एनडीए ने रणनीतिक तरीके से 30 वोट जुटाकर परिमल नाथवानी को जीत दिला दी, हालांकि इनमें दो वोट अमान्य घोषित हुए।
झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम को भी 30 वोट मिले और उन्होंने आसानी से जीत हासिल कर ली। दोनों ही उम्मीदवारों को प्रथम वरीयता के आधार पर जीत मिल गई, जिससे दूसरी वरीयता के वोटों की जरूरत ही नहीं पड़ी।
इस चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा क्रॉस वोटिंग रहा, जिसने महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनाव से पहले गठबंधन के पास जीत के लिए पर्याप्त संख्या बताई जा रही थी, लेकिन नतीजों ने अंदरूनी खींचतान और असंतोष को उजागर कर दिया।
कांग्रेस ने क्रॉस वोटिंग रोकने के लिए अपने प्रदेश प्रभारी के. राजू और सह प्रभारी सिरी बेला प्रसाद को पोलिंग एजेंट बनाया था। वहीं, राजद की ओर से भोला यादव को जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बावजूद क्रॉस वोटिंग को नहीं रोका जा सका।
हार के बाद महागठबंधन के दलों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने साफ तौर पर कहा कि राजद और माले के कुछ विधायकों ने साथ नहीं दिया, जिससे यह हार हुई।
हालांकि, राजद ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। पार्टी के केंद्रीय महासचिव भोला यादव ने कहा कि उनके सभी विधायकों ने कांग्रेस के पक्ष में ही मतदान किया और बिना जांच के इस तरह के आरोप लगाना गलत है।
वहीं, भाकपा माले ने भी कांग्रेस के आरोपों को नकारते हुए कहा कि उनके दोनों विधायकों ने गठबंधन धर्म निभाते हुए कांग्रेस उम्मीदवार को ही वोट दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने झारखंड की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। क्रॉस वोटिंग के कारण महागठबंधन की एकता पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं एनडीए की रणनीति को इस चुनाव में बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
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