रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में कथित गड़बड़ियों की जांच अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां सवाल सिर्फ परीक्षा प्रक्रिया पर नहीं, बल्कि आयोग के शीर्ष स्तर तक उठने लगे हैं। CID की जांच में सामने आए नए खुलासों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। जांच एजेंसी को ऐसे संकेत मिले हैं कि परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनियों को काम दिलाने के बदले करोड़ों रुपये और भारी कमीशन की कथित डील की गई थी।
सूत्रों के अनुसार, JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. ख्यांग्ते पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2025 में बिंसिस टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को आयोग के कार्यों में कथित तौर पर बैकडोर एंट्री दिलाने के लिए 2 करोड़ रुपये की एकमुश्त राशि और कुल भुगतान का 20 प्रतिशत कमीशन तय किया था। इससे पहले परीक्षा एजेंसी TDPL को लेकर भी इसी तरह के आरोप सामने आ चुके हैं।
मुंबई से कंपनी का निदेशक गिरफ्तार
मामले की जांच कर रही CID के इनपुट पर बिंसिस टेक्नोलॉजी के निदेशक अरुण शर्मा को मुंबई से गिरफ्तार किया गया है। अरुण शर्मा का नाम पहले भी JSSC परीक्षा अनियमितता मामले में सामने आ चुका है। गिरफ्तारी के बाद उसे रांची लाया गया है, जहां CID उससे गहन पूछताछ की तैयारी कर रही है।
जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कंपनी को कौन-कौन से कार्य सौंपे गए, टेंडर या चयन प्रक्रिया क्या थी और कथित डील की रकम का लेन-देन किन माध्यमों से हुआ।
कंप्यूटर ऑपरेटर बना ‘कड़ी’!
CID जांच में एक और अहम नाम सामने आया है। आयोग के कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार पर आरोप है कि उसने पूर्व चेयरमैन और निजी कंपनियों के बीच संपर्क स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जांच के अनुसार, धर्मेंद्र ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए कंपनियों और आयोग के बीच बातचीत कराई और कथित सौदों को आगे बढ़ाया।
धर्मेंद्र कुमार को CID पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। अब एजेंसी अरुण शर्मा और धर्मेंद्र कुमार को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ कर सकती है।
जांच में हो सकते हैं और बड़े खुलासे
CID अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। जांच का फोकस अब इस बात पर है कि आयोग में बाहरी एजेंसियों की एंट्री किस प्रक्रिया के तहत हुई और क्या इसके पीछे कोई संगठित साठगांठ काम कर रही थी।
JPSC परीक्षा विवाद पहले से ही राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का बड़ा मुद्दा बना हुआ है। ऐसे में 2 करोड़ रुपये और 20 प्रतिशत कमीशन की कथित डील के खुलासे ने पूरे मामले को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। अब सभी की नजर CID की अगली कार्रवाई और जांच से सामने आने वाले नए तथ्यों पर टिकी हुई है।
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