गोरखपुर में पत्रकारों के अधिकारों की लड़ाई अब एक नए मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। ‘इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन’ की अहम बैठक में साफ संदेश दिया गया—अब सिर्फ चर्चा नहीं, बल्कि सड़क से लेकर सिस्टम तक संघर्ष होगा।
राष्ट्रीय प्रशासनिक कार्यालय में आयोजित इस बैठक की अगुवाई इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सेराज अहमद कुरैशी ने की, जबकि संचालन अखिलेश्वर धर द्विवेदी ने संभाला। माहौल औपचारिक जरूर था, लेकिन मुद्दों की गंभीरता ने इसे एक निर्णायक बैठक बना दिया।
बैठक में सबसे बड़ा फैसला पत्रकार सुरक्षा कानून को लेकर आंदोलन छेड़ने का लिया गया। संगठन ने साफ कहा कि अब हर जिले में आवाज बुलंद होगी, प्रशासन को ज्ञापन दिए जाएंगे और जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पत्रकारों के साथ बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला बताया गया।
सिर्फ आंदोलन ही नहीं, संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने की भी रणनीति बनाई गई। सदस्यता अभियान को तेज करने का निर्णय लिया गया, ताकि ज्यादा से ज्यादा पत्रकार इस मंच से जुड़ सकें और उनकी आवाज को ताकत मिल सके। वक्ताओं ने कहा कि जब संगठन मजबूत होगा, तभी पत्रकार सुरक्षित और स्वतंत्र होकर काम कर पाएंगे।
बैठक में पत्रकारों के सामने खड़ी चुनौतियों—सुरक्षा की कमी, निष्पक्ष माहौल का अभाव, प्रशासनिक सहयोग में गिरावट और कानूनी संरक्षण की जरूरत—पर गहन मंथन हुआ। इन समस्याओं के समाधान के लिए ठोस रणनीति तैयार करने पर सहमति बनी।
इसके साथ ही लखनऊ में प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार सम्मान समारोह और महाधिवेशन को लेकर भी चर्चा हुई। इस आयोजन के जरिए देश-विदेश के पत्रकारों को एक मंच पर लाने और उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित करने की योजना है।
बैठक के अंत में सेराज अहमद कुरैशी ने एकजुटता का संदेश देते हुए कहा कि पत्रकारों के अधिकारों और सम्मान के लिए यह संघर्ष अब लगातार जारी रहेगा।
कुल मिलाकर, यह बैठक एक चेतावनी भी थी और एक शुरुआत भी—पत्रकार अब खामोश नहीं रहेंगे, बल्कि अपने हक के लिए संगठित होकर आवाज बुलंद करेंगे।
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