पलामू: पलामू जिले के पड़वा प्रखंड के सिक्का गांव में एक ही परिवार के छह सदस्यों की 19 दिनों के भीतर मौत ने पूरे इलाके को दहला दिया है। मौत का यह सिलसिला 19 जून से शुरू हुआ था, जो 6 जुलाई को परिवार की छठी सदस्य लाखो देवी की रिम्स में मौत के साथ थमा।
स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आया है कि परिवार के सदस्यों की तबीयत विषाक्त सरसों तेल के सेवन से हुई ड्रॉप्सी बीमारी के कारण बिगड़ी थी। जांच में सरसों के तेल में आर्गेमोन (कंटीले) तेल की मिलावट पाई गई है।
जानकारी के अनुसार, सिक्का गांव निवासी कुलदीप महतो के परिवार में नौ सदस्य थे, लेकिन अब इस परिवार में सिर्फ तीन लोग ही बचे हैं। परिवार के सातवें सदस्य का अभी भी रिम्स में इलाज चल रहा है।
19 जून से शुरू हुआ मौत का सिलसिला
इस परिवार में पहली मौत 19 जून को परिवार के मुखिया कुलदीप महतो की हुई थी। इसके अगले दिन 20 जून को उनकी बेटी बबिता कुमारी ने दम तोड़ दिया।
इसके बाद 26 जून को दूसरी बेटी इंदु कुमारी, जबकि 28 जून को बहू श्वेता और बेटे नकुल मेहता की मौत हो गई।
परिवार की आखिरी सदस्य कुलदीप महतो की पत्नी लाखो देवी ने 6 जुलाई को रिम्स में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
कैसे हुई मौत की वजह की पहचान?
लगातार हो रही मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू की। परिवार के घर में मौजूद खाने-पीने की चीजों की जांच कराई गई।
लैब जांच में सामने आया कि सरसों के तेल में आर्गेमोन तेल की मिलावट थी, जिसके सेवन से ड्रॉप्सी बीमारी हुई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इसी जहरीले तेल के कारण परिवार के सदस्यों की हालत बिगड़ी और मौतें हुईं।
बताया जा रहा है कि परिवार ने करीब डेढ़ महीने पहले अपने खेत की सरसों से तेल निकलवाया था।
गांव में स्वास्थ्य विभाग का अभियान
मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सिक्का गांव में विशेष सर्वे अभियान चलाया।
195 घरों के 1378 लोगों का स्वास्थ्य सर्वे किया गया, जिसमें संदिग्ध पाए गए 59 लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए। जांच में सभी स्वस्थ पाए गए।
विभाग ने ग्रामीणों को दूषित तेल के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी है। साथ ही कृषि विभाग को सरसों की फसल में उगने वाले कंटीले जहरीले खरपतवार (आर्गेमोन) को हटाने के लिए विशेष अभियान चलाने की सिफारिश की गई है।
अब सिर्फ तीन सदस्य बचे
कुलदीप महतो के परिवार में अब सिर्फ तीन सदस्य बचे हैं। उनका एक बेटा अनुज मेहता मजदूरी के कारण गांव से बाहर था, इसलिए वह सुरक्षित है। वहीं परिवार का एक पोता अपनी नानी के घर रहने के कारण बच गया।
एक ही परिवार के छह लोगों की मौत ने सिक्का गांव में मातम पसार दिया है। स्वास्थ्य विभाग अब पूरे क्षेत्र में जहरीले तेल और ड्रॉप्सी बीमारी को लेकर लोगों को जागरूक करने में जुटा है।
ये खबर भी पढ़े: Jharkhand: जमशेदपुर में मलेरिया का कहर, 9 दिन में 1167 केस, 5 बच्चों की मौत, ब्रेन मलेरिया ने बढ़ाई चिंता!