भागलपुर: सावन की भक्ति में जहां कांवरिया बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के लिए सुल्तानगंज से देवघर की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं कांवरिया पथ पर दोस्ती की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। काशी के रहने वाले दीपक कनौजिया और प्रमोद पांडे की कहानी इन दिनों कांवरिया पथ पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
प्रमोद अपने पैरों से चल नहीं सकते, लेकिन बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलाभिषेक की उनकी इच्छा को उनके बचपन के दोस्त दीपक ने कमजोरी नहीं बनने दिया। दीपक ने दोस्त को अपने कंधे पर बैठाया और करीब 105 किलोमीटर की पैदल कांवर यात्रा पर निकल पड़े।
दोस्त की इच्छा को बनाया अपना संकल्प
सुल्तानगंज में उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरने के बाद दोनों देवघर की ओर रवाना हुए। रास्ता लंबा है, सफर कठिन है और कंधे पर दोस्त का भार भी है, लेकिन दीपक के हौसले के आगे यह सब छोटा नजर आ रहा है।
बताया गया कि यह पहली बार नहीं है। पिछले आठ वर्षों से दोनों दोस्त इसी तरह सावन में बाबा बैद्यनाथ की यात्रा कर रहे हैं। इस बार भी करीब आठ दिनों में 105 किलोमीटर की दूरी तय करने का संकल्प है।
एक दोस्त कंधे पर, दूसरा दोस्त हौसले पर
कांवरिया पथ पर जब दीपक अपने कंधे पर प्रमोद को लेकर आगे बढ़ते हैं तो राहगीर और दूसरे कांवरिया भी ठहरकर इस अनोखी दोस्ती को देखते हैं। किसी के लिए यह आस्था की तस्वीर है तो किसी के लिए दोस्ती की ऐसी मिसाल, जिसमें एक दोस्त ने दूसरे की मजबूरी को अपनी जिम्मेदारी बना लिया।
दीपक के लिए यह सिर्फ कांवर यात्रा नहीं, बल्कि दोस्ती का फर्ज है। वहीं प्रमोद के लिए दीपक केवल बचपन के दोस्त नहीं, बल्कि उनकी यात्रा की ताकत हैं।
105 किलोमीटर का रास्ता… लेकिन हौसला उससे बड़ा
दोनों दोस्तों की जुबां पर बाबा बैद्यनाथ का नाम है और आंखों में देवघर पहुंचने की आस। दीपक अपने दोस्त के लिए महादेव से खुशहाल जीवन की कामना करते हैं, जबकि प्रमोद भी यही प्रार्थना करते हैं कि उनकी दोस्ती का साथ जिंदगीभर बना रहे।
सुल्तानगंज से देवघर के इस आस्था पथ पर दीपक और प्रमोद की कहानी यही संदेश दे रही है—सच्चा दोस्त वह नहीं जो सिर्फ साथ चले, बल्कि वह है जो जरूरत पड़ने पर आपके कदमों की ताकत बन जाए।
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