पटना: राजधानी पटना में इन दिनों एक ऐसा संकट खड़ा हो गया है, जिसका असर सीधे शहर की सड़कों पर दिखने लगा है। नगर निगम के हजारों सफाईकर्मियों के हड़ताल पर जाते ही सफाई व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर गई है। जहां रोज सुबह झाड़ू और कचरा गाड़ियों की आवाज सुनाई देती थी, वहां अब कचरे के ढेर नजर आने लगे हैं।
नगर निगम के करीब 4800 से ज्यादा सफाईकर्मी और ड्राइवर अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इसका असर यह हुआ कि गुरुवार को न सड़कों की सफाई हुई, न डोर-टू-डोर कचरा उठाने वाली गाड़ियां निकलीं और न ही बड़ी कचरा गाड़ियां दौड़ीं।
कचरा उठेगा या आंदोलन चलेगा?—सवालों में घिरा निगम
सफाईकर्मियों के आंदोलन ने नगर निगम प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। बारिश के मौसम में अगर हड़ताल लंबी चली तो शहर में गंदगी के साथ स्वास्थ्य संकट भी बढ़ सकता है।
कर्मचारियों का आरोप- सालों से सिर्फ आश्वासन मिला
हड़ताल कर रहे कर्मियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। उनकी मांग है कि दैनिक मजदूरों को स्थायी किया जाए, समान वेतन मिले और आउटसोर्स व्यवस्था खत्म कर कर्मचारियों को निगम में शामिल किया जाए।
डेढ़ महीने पहले दी थी चेतावनी, फिर भी नहीं बनी बात
पटना नगर निगम समन्वय समिति के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश सिंह ने कहा कि हड़ताल की सूचना पहले ही दे दी गई थी। अगर समय रहते बातचीत होती तो यह स्थिति नहीं आती।
अब फैसला प्रशासन के हाथ में
एक तरफ सफाईकर्मी अपनी मांगों पर अड़े हैं, तो दूसरी तरफ राजधानी के लोग कचरे की समस्या से परेशान होने लगे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और निगम प्रशासन इस सफाई संकट को कैसे खत्म करता है।
पटना की सड़कें अब सिर्फ रास्ते नहीं दिखा रहीं, बल्कि नगर निगम और सफाईकर्मियों के बीच चल रही बड़ी लड़ाई की कहानी भी बता रही हैं।
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