लखीसराय (बिहार): लखीसराय की राजनीति में एक बार फिर घमासान तेज हो गया है। एक ओर 25 जून 2026 को मुंगेर के सांसद सह केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह का जिले में दौरा प्रस्तावित है, जहां वे बीस सूत्री कार्यक्रम एवं क्रियान्वयन समिति की बैठक में शामिल होंगे, वहीं दूसरी ओर जिला परिषद की राजनीति में अविश्वास प्रस्ताव ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है।
जिला परिषद अध्यक्ष अंशु कुमारी के खिलाफ सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव की अधियाचना सौंप दी है। बताया जा रहा है कि कम से कम 11/5 निर्वाचित सदस्यों ने उनके नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए “विश्वास खत्म” होने की बात कही है। इस प्रस्ताव की कॉपी जिला परिषद कार्यालय में जमा कर दी गई है, जिससे साफ है कि आने वाले दिनों में अध्यक्ष की कुर्सी पर संकट गहरा सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम में बीजेपी विधायक विजय कुमार सिन्हा के करीबी रिश्तेदार चुनचुन देवी समेत पांच पार्षदों की सक्रिय भूमिका सामने आई है। चुनचुन देवी, भानु कुमार, रविराज, खुशबू कुमारी और अमित सागर ने अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। इससे जेडीयू और बीजेपी के बीच स्थानीय स्तर पर टकराव की स्थिति बनती दिख रही है।
अविश्वास प्रस्ताव में अध्यक्ष अंशु कुमारी पर कुल 12 गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इनमें सबसे बड़ा आरोप “विश्वास का संकट” बताया गया है। सदस्यों का कहना है कि अध्यक्ष का पद जनता के भरोसे का प्रतीक होता है, लेकिन वर्तमान नेतृत्व में यह भरोसा पूरी तरह खत्म हो चुका है। इसके अलावा कार्यशैली, निर्णय प्रक्रिया, परामर्श की कमी और प्रशासनिक समन्वय में गिरावट जैसे मुद्दे भी प्रमुख रूप से उठाए गए हैं। सदस्यों का यह भी आरोप है कि कई बार बैठकों और चर्चाओं के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ और जिला परिषद में आपसी विश्वास व सहयोग का माहौल कमजोर पड़ गया है।
कानूनी रूप से यह पूरा मामला बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006 की धारा 70(4) के तहत आता है। इस प्रावधान के अनुसार कुल निर्वाचित सदस्यों का कम से कम एक-पांचवां हिस्सा अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है। यदि अध्यक्ष निर्धारित समय सीमा में बैठक नहीं बुलाती हैं, तो सक्षम अधिकारी, यानी डीएम सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी, खुद विशेष बैठक बुलाकर मतदान करा सकते हैं।
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। यदि विशेष बैठक बुलाई जाती है तो अध्यक्ष की कुर्सी पर सीधा मतदान होगा। ऐसे में लखीसराय की पंचायत राजनीति “कुर्सी बचाओ बनाम कुर्सी हटाओ” के टकराव में बदलती दिख रही है। आगामी पंचायत चुनाव से पहले इस घटनाक्रम ने जिले की सियासत को और ज्यादा गर्मा दिया है।
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