पटना: बिहार के सहायता प्राप्त मदरसा और संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों को पिछले छह महीने से वेतन नहीं मिलने का मामला अब सड़क से लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस तक पहुंच गया है। लगातार वेतन भुगतान नहीं होने से शिक्षकों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर मदरसा डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (MDO) के आह्वान पर सोमवार, 10 अगस्त को पटना के IMA हॉल, गांधी मैदान में प्रदेशभर के मदरसा एवं संस्कृत विद्यालयों के शिक्षक जुटे और सरकार से लंबित वेतन का तत्काल भुगतान करने की मांग की।
शिक्षकों का कहना है कि छह महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर बच्चों की पढ़ाई, इलाज और अन्य खर्चों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। संगठन ने दावा किया कि आर्थिक परेशानी के कारण कई शिक्षक गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। कई परिवारों को राशन और जरूरी सामान उधार पर भी मिलना मुश्किल हो गया है।
MDO की ओर से बताया गया कि वेतन भुगतान की मांग को लेकर मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और संबंधित अधिकारियों को कई बार ज्ञापन सौंपा जा चुका है। पिछले सप्ताह 30 जुलाई 2026 को भी प्रदेश के सभी जिलों में जिलाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री को सामूहिक ज्ञापन भेजा गया था। इसके बावजूद अब तक लंबित वेतन भुगतान की समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो सका है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में MDO के महासचिव महताब आलम ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष विधानसभा चुनाव से पहले सितंबर में संगठन की ओर से पटना के गर्दनीबाग में बड़ा आंदोलन किया गया था। उस दौरान मदरसा शिक्षकों के वार्षिक वेतन वृद्धि, आवास भत्ता, चिकित्सा भत्ता और मदरसों को अल्पसंख्यक विद्यालय का दर्जा देने सहित कई मांगें सरकार के सामने रखी गई थीं।
महताब आलम के अनुसार, सरकार की ओर से आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन समाप्त किया गया था, लेकिन करीब एक वर्ष बीतने के बावजूद कई मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि अब जांच के नाम पर शिक्षकों के वेतन भुगतान का आवंटन रोक दिया गया है, जिससे शिक्षक मानसिक और आर्थिक परेशानी झेल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि किसी संस्थान या व्यवस्था की जांच चल रही है तो उसकी समीक्षा और जांच सरकार तथा संबंधित विभाग का काम है। जांच के नाम पर शिक्षकों का वेतन रोकना उचित नहीं है। इसका असर केवल शिक्षकों और उनके परिवारों पर ही नहीं, बल्कि विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिक्षकों ने सरकार से स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि छह महीने से वेतन लंबित रहने के कारण शिक्षक गंभीर आर्थिक दबाव में हैं। संगठन ने मांग की कि लंबित वेतन का भुगतान तत्काल किया जाए और भविष्य में वेतन भुगतान में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
MDO ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने लंबित वेतन भुगतान और शिक्षकों की अन्य मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो संगठन आगे आंदोलन को और व्यापक करने पर विचार करेगा। संगठन का कहना है कि शिक्षक सम्मानजनक तरीके से अपना दायित्व निभाना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए समय पर वेतन और मूलभूत अधिकार सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
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