शेखपुरा: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के दौरान बरबीघा आगमन से पहले एक खुला पत्र सामने आया है, जिसमें स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता शिवकुमार ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए पुराने वादों की याद दिलाई है। उन्होंने कहा कि 2005 में मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार कई बार शेखपुरा आ चुके हैं, लेकिन बरबीघा को अनुमंडल बनाने की वर्षों पुरानी मांग आज तक अधूरी है।
खुले पत्र में कहा गया है कि 2005 में बरबीघा के एसकेआर कॉलेज में आयोजित धन्यवाद यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने खुले मंच से बरबीघा को अनुमंडल बनाने की घोषणा की थी। उस समय लोगों को उम्मीद जगी थी कि क्षेत्र को प्रशासनिक पहचान मिलेगी, लेकिन दो दशक बीतने के बाद भी यह घोषणा धरातल पर नहीं उतर सकी। इसे लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी भी बढ़ रही है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि बरबीघा ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। यह वही भूमि है जहां बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्री कृष्ण सिंह का जन्म हुआ था। इसके बावजूद इस इलाके की लगातार उपेक्षा की जा रही है। सवाल उठाया गया है कि आखिर बरबीघा को उसका हक कब मिलेगा।
शिवकुमार ने अपने पत्र में पुरानी राजनीतिक पृष्ठभूमि का भी जिक्र करते हुए लिखा है कि जब नीतीश कुमार युवालोकदल के राष्ट्रीय महासचिव थे, तब बरबीघा को तत्कालीन मुंगेर जिले से हटाकर नालंदा जिले में जोड़ने और अस्थावां व सरमेरा को मिलाकर अनुमंडल बनाने की बात कही गई थी। उस समय इस मांग को लेकर बैठकें, आंदोलन और धरना-प्रदर्शन भी हुए थे।
उन्होंने याद दिलाया कि 1958 में नए जिला, अनुमंडल और प्रखंड के गठन को लेकर बनी बख्शी समिति ने भी बरबीघा को अनुमंडल बनाने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन दशकों बाद भी यह प्रस्ताव फाइलों में ही दबा हुआ है।
खुले पत्र में मुख्यमंत्री से दो बड़ी मांगें भी रखी गई हैं। पहली, बरबीघा को शेखोपुरसराय, बरबीघा और मेहुस को मिलाकर अनुमंडल का दर्जा दिया जाए। दूसरी, शेखपुरा जिले में बनने वाले प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज को बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्री बाबू के नाम पर बरबीघा में स्थापित किया जाए। इसके लिए पर्याप्त सरकारी जमीन उपलब्ध होने का भी दावा किया गया है।
पत्र के अंत में मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा गया है कि यदि वे बरबीघा को अनुमंडल बनाने और यहां मेडिकल कॉलेज की घोषणा कर देते हैं, तो यह क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक फैसला होगा और उनका नाम बरबीघा के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो जाएगा।
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