शेखपुरा: शेखपुरा जिला अंतर्गत बरबीघा की सुबह अब एक नई उम्मीद के साथ शुरू होती है। सूरज की पहली किरण के साथ ही बरबीघा रेफरल हॉस्पिटल के बाहर मरीजों की कतार लग जाती है। इन उम्मीदों को संवारने का नाम है — डॉ.फैसल अरशद।
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कभी एक सामान्य सरकारी अस्पताल माने जाने वाला यह संस्थान आज विश्वास का प्रतीक बन चुका है। प्रतिदिन लगभग 400 से 500 मरीज यहां उपचार के लिए पहुंचते हैं। बुजुर्ग अपने पुराने दर्द के साथ, माताएं अपने बच्चों को गोद में लेकर और युवा नई आशा के साथ यहां आते हैं — और अधिकांश को मिलता है भरोसा, संवेदनशीलता और गुणवत्तापूर्ण इलाज।
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डॉ. फैसल अरशद ने अस्पताल को केवल उपचार केंद्र नहीं, बल्कि सेवा और मानवीय संवेदना का स्थल बना दिया है। स्वच्छता, दवाइयों की उपलब्धता, सुव्यवस्थित वार्ड और आधुनिक सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। अस्पताल परिसर में सुसज्जित हरियाली और फूल-पौधे सकारात्मक वातावरण का संदेश देते हैं।
इस सेवा कार्य में उनकी पत्नी Dr. Noor Fatima भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। एक कुशल स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने अनेक माताओं और बेटियों को सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की हैं। पति-पत्नी की यह संयुक्त प्रतिबद्धता अस्पताल की कार्यशैली में स्पष्ट झलकती है।
आज स्थिति यह है कि लोग निजी अस्पतालों की ऊंची फीस से बचते हुए सरकारी अस्पताल में ही उपचार कराने पर गर्व महसूस करते हैं। बरबीघा रेफरल अस्पताल ने राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष 50 संस्थानों में स्थान बनाकर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।
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डॉ. फैसल अरशद को जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। हालांकि वे कहते हैं कि मरीज का स्वस्थ होकर घर लौटना ही उनका सबसे बड़ा पुरस्कार है।
यह कहानी एक चिकित्सक की नहीं, बल्कि सकारात्मक नेतृत्व और समर्पण की मिसाल है, जिसने एक छोटे कस्बे के सरकारी अस्पताल को उत्कृष्टता की पहचान दिलाई।