शेखपुरा: बिहार में धान की कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) आपूर्ति से जुड़े कथित घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के पटना जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत शेखपुरा जिले में मेसर्स एरेना फूड एंड एग्रो इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी 1,09,26,808 रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है। एजेंसी के मुताबिक, यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 7 अक्टूबर को की गई।
मामले की जड़ वर्ष 2012-13 में बिहार राज्य खाद्य निगम (BSFC) से धान की खरीद और उसके बदले निर्धारित मात्रा में चावल की आपूर्ति से जुड़ी है। ईडी का आरोप है कि कंपनी ने अनुबंध के मुताबिक पूरा चावल जमा नहीं किया, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। अब एजेंसी कथित बकाया राशि और उससे जुड़ी संपत्तियों के लेनदेन की जांच कर रही है।
1.09 करोड़ रुपये की संपत्ति पर ED की कार्रवाई
ईडी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, शेखपुरा में जब्त की गई संपत्तियों का मूल्य 1 करोड़ 9 लाख 26 हजार 808 रुपये है। एजेंसी ने बताया कि ये संपत्तियां कंपनी और उससे जुड़े कुछ लोगों की हैं। इनमें कंपनी के निदेशक श्रीकृष्णा कुमार, राधे शर्मा की पत्नी शोभा कुमारी और उनके दोनों बेटों कन्हैया कुमार तथा कुबेर कश्यप से संबंधित संपत्तियां शामिल बताई गई हैं।
यह जब्ती फिलहाल अस्थायी है। इसका उद्देश्य जांच के दौरान कथित अपराध से जुड़ी संपत्तियों को सुरक्षित रखना है। संपत्तियों के संबंध में अंतिम निर्णय संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा।
2012-13 में BSFC से खरीदा गया था 63 हजार क्विंटल से अधिक धान
ईडी की जांच के मुताबिक, कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2012-13 के दौरान बिहार राज्य खाद्य निगम से कुल 63,092.45 क्विंटल धान खरीदा था। अनुबंध के तहत कंपनी को इस धान का 67 प्रतिशत हिस्सा चावल के रूप में तैयार कर निगम को देना था।
इस हिसाब से कंपनी को 30 दिसंबर 2013 तक 42,271.94 क्विंटल कस्टम मिल्ड राइस (CMR) की आपूर्ति करनी थी। कस्टम मिल्ड राइस वह चावल होता है, जिसे सरकारी व्यवस्था के तहत खरीदे गए धान की मिलिंग कर निर्धारित मानकों के अनुसार निगम को लौटाया जाता है।
लेकिन ईडी का आरोप है कि कंपनी ने निर्धारित मात्रा के मुकाबले काफी कम चावल जमा किया। इसी कथित कमी को लेकर मामला जांच के दायरे में आया।
23 हजार क्विंटल से अधिक चावल की कमी का आरोप
ईडी के अनुसार, कंपनी ने बिहार राज्य खाद्य निगम को केवल 19,170 क्विंटल चावल की आपूर्ति की। जबकि निर्धारित मात्रा 42,271.94 क्विंटल थी। इस तरह एजेंसी के मुताबिक 23,101.94 क्विंटल चावल की कमी रह गई।
ईडी ने इस कथित कमी की कीमत 2,165.56 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करीब 5,00,28,637 रुपये आंकी है। एजेंसी का आरोप है कि इससे सरकारी खजाने को लगभग 5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
हालांकि, ये आंकड़े जांच एजेंसी के दावों पर आधारित हैं। मामले में आरोपों और संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।
1.21 करोड़ रुपये जमा, फिर भी करीब 3.79 करोड़ रुपये बकाया होने का दावा
ईडी की रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में एरेना फूड एंड एग्रो इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड ने बिहार राज्य खाद्य निगम को करीब 1.21 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। इसके बावजूद एजेंसी ने लगभग 3.79 करोड़ रुपये की बकाया राशि का उल्लेख किया है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि निर्धारित चावल की आपूर्ति नहीं होने के बाद संबंधित रकम सरकारी खजाने में वापस नहीं की गई। ईडी इस बकाया राशि को कथित अपराध से अर्जित आय यानी Proceeds of Crime के रूप में देख रही है।
खुले बाजार में चावल बेचने और रकम के इस्तेमाल का आरोप
ईडी के अनुसार, जांच में यह आरोप सामने आया कि निर्धारित मात्रा में निगम को लौटाया जाने वाला चावल कथित तौर पर खुले बाजार में बेच दिया गया। एजेंसी का कहना है कि एफआईआर दर्ज होने और बिहार राज्य खाद्य निगम की ओर से बार-बार अनुस्मारक जारी किए जाने के बावजूद कथित बकाया राशि का पूरा भुगतान नहीं हुआ।
ईडी ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित गतिविधियों से प्राप्त धनराशि का इस्तेमाल कारोबार में किया गया और बाद में उसे अन्य लेनदेन के जरिए स्थानांतरित किया गया। इन्हीं पहलुओं की पड़ताल के तहत संपत्तियों और बैंक खातों से जुड़े लेनदेन की जांच की जा रही है।
कंपनी के निदेशकों और परिवार से जुड़े खातों की भी जांच
जांच एजेंसी के मुताबिक, कंपनी के बैंक खातों से रकम निदेशकों, मुख्य आरोपी के परिवार के सदस्यों और उनके बेटों से जुड़ी पारिवारिक संस्थाओं के खातों में स्थानांतरित किए जाने के आरोप हैं।
ईडी ने इन कथित वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों के बीच संबंधों की जांच करते हुए 1.09 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि संपत्तियां किस धनराशि से खरीदी गईं और उनका कथित अपराध से क्या संबंध है।
FIR से शुरू हुई मनी लॉन्ड्रिंग की जांच
ईडी के मुताबिक, मेसर्स एरेना एग्रो इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक राधे शर्मा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज प्राथमिकी के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की गई थी। संबंधित मामले में खाद्य निगम को चावल की आपूर्ति और कथित बकाया राशि प्रमुख जांच बिंदु हैं।
अब तक की कार्रवाई में एजेंसी ने संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है। मामले की आगे की जांच जारी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में कथित धन के प्रवाह, संपत्तियों की खरीद और कंपनी के लेनदेन को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।
फिलहाल, शेखपुरा में हुई यह कार्रवाई सरकारी धान खरीद और चावल आपूर्ति व्यवस्था से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में ईडी का बड़ा कदम है। हालांकि, जांच एजेंसी के आरोपों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। मामले में संबंधित पक्षों का जवाब और अदालत की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।