पटना: एक नाबालिग बच्ची की कस्टडी को लेकर सामने आए पेचीदा मामले में पटना हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। बच्ची पर दो अलग-अलग व्यक्तियों ने पिता होने का दावा किया है। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने बच्ची सहित दोनों दावेदारों का DNA परीक्षण कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने बच्ची को फिलहाल मधुबनी के चाइल्ड केयर होम में रखने का भी आदेश दिया है।
मामले की सुनवाई जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस सुनील दत्त मिश्रा की खंडपीठ ने की। कोर्ट के सामने दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे और दस्तावेज रखे गए। एक दावेदार ने बच्ची को अपनी बेटी बताया, जबकि दूसरे व्यक्ति ने भी बच्ची के पिता होने का दावा किया। उसने अपने विवाह और बच्ची के जन्म से जुड़े दस्तावेज अदालत के सामने पेश किए।
मामले में बच्ची की मां पूजा कुमारी की सड़क हादसे में मौत का भी उल्लेख सामने आया। इसके बाद बच्ची की कस्टडी को लेकर विवाद बढ़ गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और बच्ची से हुई बातचीत को भी ध्यान में रखा। कोर्ट ने बच्ची की सुरक्षा और उचित देखभाल को प्राथमिकता देते हुए उसे चाइल्ड केयर होम में रखने का निर्देश दिया।
अदालत ने मधुबनी के जिलाधिकारी और सिविल सर्जन को बच्ची तथा दोनों दावेदारों का DNA टेस्ट कराने और रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है। साथ ही बच्ची की काउंसलिंग के लिए चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट की व्यवस्था करने का निर्देश भी दिया गया है।
कोर्ट ने अगली सुनवाई तक किसी भी दावेदार को बच्ची से मिलने की अनुमति नहीं दी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर 2026 को होगी। DNA रिपोर्ट के बाद ही पितृत्व के दावे को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
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