भारत/नेपाल: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद 11वें दिन भी राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और विदेशी विशेषज्ञ टीमें अभियान चला रही हैं। शनिवार को राहत और बचाव अभियान के दौरान दो महत्वपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन सामने आए। वहीं, आपदा से प्रभावित करीब 84 हजार लोगों तक मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने करीब 5 करोड़ अमेरिकी डॉलर जुटाने की अपील की है।
इसी बीच नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह 24 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि वे वैश्विक मंच से नेपाल की आपदा, जलवायु परिवर्तन, राहत और पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मांग रखेंगे।
अपर त्रिशूली-1 की सुरंग से चीनी नागरिक का सुरक्षित रेस्क्यू
बाढ़ के 11वें दिन शनिवार को बाढ़ प्रभावित अपर त्रिशूली-1 (216 मेगावाट) जलविद्युत परियोजना की एडिट-4 सुरंग से एक चीनी नागरिक को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, नेपाली सेना और दक्षिण कोरिया की आपदा विशेषज्ञ टीम ने संयुक्त अभियान चलाकर सुरंग के अंदर फंसे चीनी नागरिक को बाहर निकाला। रेस्क्यू के बाद उन्हें तत्काल चिकित्सकीय सहायता के लिए नुवाकोट के त्रिशूली स्थित मैथिली बैरक ले जाया जा रहा है।
यह रेस्क्यू इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आपदा के 11 दिन बाद भी सुरंगों और दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों की तलाश लगातार जारी है।
64 वर्षीय महिला भी 11 दिन बाद घर की चौथी मंजिल से निकाली गईं
नुवाकोट जिले में ही एक और भावुक कर देने वाला रेस्क्यू ऑपरेशन सामने आया। सशस्त्र पुलिस बल की टीम ने शनिवार को विदुर-वेत्रावती क्षेत्र स्थित एक घर की चौथी मंजिल से 64 वर्षीय चण्डिका श्रेष्ठ को सुरक्षित बाहर निकाला।
बताया गया कि महिला बाढ़ के कारण अपने घर में फंसी हुई थीं। 11 दिन बाद उन्हें सुरक्षित निकाला गया। उनकी स्थिति खराब होने के कारण उन्हें हेलीकॉप्टर से इलाज के लिए काठमांडू ले जाया जा रहा है।
दोनों रेस्क्यू ऑपरेशन यह दिखाते हैं कि आपदा के कई दिन गुजरने के बाद भी बचाव दल दुर्गम और प्रभावित क्षेत्रों में अभियान जारी रखे हुए हैं।
84 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित, UN ने मांगे 5 करोड़ डॉलर
नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से 84 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। प्रभावित परिवारों को तत्काल भोजन, आश्रय, स्वच्छ पानी, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य जरूरी सहायता की जरूरत है।
इसी को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगी मानवीय संगठनों ने करीब 5 करोड़ अमेरिकी डॉलर जुटाने की अपील की है। यह राशि नेपाल सरकार के नेतृत्व में तैयार की गई चार महीने की मानवीय सहायता योजना को प्राथमिकता के आधार पर लागू करने में इस्तेमाल की जाएगी।
इस योजना का विशेष जोर सर्दी शुरू होने से पहले सबसे ज्यादा प्रभावित और दुर्गम बस्तियों तक राहत पहुंचाने पर है।
राहत अभियान में इन चीजों पर जोर
संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगी संगठनों के अनुसार प्रभावित लोगों तक नकद सहायता, भोजन, अस्थायी आश्रय, स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, अन्य जीवनरक्षक सामग्री, पहुंचाने को प्राथमिकता दी जाएगी।
नेपाल में संयुक्त राष्ट्र की आवासीय समन्वयक लीला पीटर्स याहिया ने कहा है कि सरकार के नेतृत्व में सबसे दुर्गम समुदायों तक राहत पहुंचाना अभियान की प्रमुख प्राथमिकता है।
बाढ़ के बाद अब पुनर्वास और सर्दी की चुनौती
राहत एजेंसियों के सामने अब केवल तत्काल बचाव ही चुनौती नहीं है। बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों के लिए आने वाली सर्दी से पहले आश्रय की व्यवस्था करना भी बड़ी चुनौती बन गया है।
नेपाल सरकार के साथ समन्वय करते हुए UN और उसके साझेदार संगठन सबसे ज्यादा तबाह इलाकों में मानवीय सहायता पहुंचाने की तैयारी में जुटे हैं। दुर्गम क्षेत्रों में परिवहन और पहुंच की समस्या राहत अभियान को और कठिन बना रही है।
24 सितंबर को UN महासभा में बोलेंगे बालेन्द्र शाह
नेपाल की आपदा अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी प्रमुख मुद्दा बनने जा रही है। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह 24 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करेंगे।
शाह 22 सितंबर से अमेरिका की यात्रा पर जाएंगे। संशोधित कार्यक्रम के मुताबिक 24 सितंबर को दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक 18 नेता महासभा को संबोधित करेंगे। नेपाल के प्रधानमंत्री इस सूची में 17वें वक्ता होंगे, जबकि उनके ठीक बाद इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी संबोधन करेंगी।
संयुक्त राष्ट्र की ओर से अब तक महासभा में 118 देशों के नेताओं के संबोधन का कार्यक्रम तैयार किया जा चुका है।
जलवायु न्याय और नेपाल के पुनर्निर्माण पर रखेंगे बात
आपदा के बाद प्रधानमंत्री शाह के खुद महासभा को संबोधित करने की तैयारी को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संभावना है कि वे नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन को जलवायु परिवर्तन से जोड़ते हुए जलवायु न्याय और आपदा से हुए नुकसान की भरपाई का मुद्दा उठा सकते हैं।
इसके साथ ही नेपाल के पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहयोग की अपील किए जाने की संभावना है।
आपदा से पहले महासभा में नेपाल की ओर से विदेश मंत्री शिशिर खनाल को संबोधित करना था, लेकिन 26 अगस्त की महाविपदा के बाद सरकार ने प्रधानमंत्री शाह को स्वयं महासभा में भेजने का फैसला किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की भी कोशिश
प्रधानमंत्री शाह की अमेरिका यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुलाकातों की संभावना है। उनके कार्यक्रम के आधार पर ‘साइडलाइन’ बैठकों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
बताया गया है कि न्यूयॉर्क में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से प्रधानमंत्री शाह की संभावित मुलाकात की कोशिश भी की जा रही है। हालांकि, मुलाकात को लेकर अंतिम कार्यक्रम उनके अमेरिका दौरे की आधिकारिक रूपरेखा पर निर्भर करेगा।
प्रधानमंत्री बनने के करीब पांच महीने बाद शाह की यह पहली विदेश यात्रा होगी।
कौन-कौन रहेगा प्रधानमंत्री के साथ?
प्रधानमंत्री के साथ अमेरिका जाने वाले प्रतिनिधिमंडल में उनके मुख्य सलाहकार कुमार बेन, प्रमुख स्वकीय सचिव सुवास शर्मा, निजी सचिव प्रदीप परियार और फोटोग्राफर विनय शाक्य शामिल होंगे।
वहीं विदेश सचिव अमृतबहादुर राई, संयुक्त राष्ट्र मामलों से जुड़े महाशाखा प्रमुख कृष्ण प्रसाद ढकाल, शिष्टाचार महापाल कुमार राज खरेल और न्यूयॉर्क स्थित नेपाली स्थायी मिशन के प्रमुख लोक बहादुर थापा भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होंगे।
विदेश मंत्री शिशिर खनाल भी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में शामिल होंगे।
राहत अभियान के बीच छोटी रखी जाएगी विदेश यात्रा
नेपाल में अभी राहत और बचाव अभियान जारी रहने के कारण सरकार प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा को यथासंभव छोटा रखने की तैयारी में है। महासभा को संबोधित करने के बाद उनके स्वदेश लौटने की संभावना है।
फिलहाल नेपाल में एक तरफ सुरंगों और घरों में फंसे लोगों को निकालने का अभियान जारी है, तो दूसरी तरफ हजारों प्रभावित परिवारों के लिए भोजन, आश्रय और स्वास्थ्य सुविधा की चुनौती बनी हुई है। ऐसे में प्रधानमंत्री शाह का संयुक्त राष्ट्र महासभा में संबोधन नेपाल की आपदा को वैश्विक मंच पर मजबूती से उठाने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
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