बगहा: पश्चिम चंपारण के बगहा में पत्नी की हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी पति को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। साथ ही मृतका के दोनों नाबालिग बच्चों के भविष्य को देखते हुए बिहार सरकार को परवरिश योजना के तहत आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
मामला धनहा थाना क्षेत्र के बैरा बाजार टोला मुसहरी का है। यहां बुनिलाल यादव के पुत्र सुभाष यादव पर अपनी पत्नी रीना देवी की हत्या का आरोप था। इस संबंध में 30 जुलाई 2020 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
मोटरसाइकिल और भैंस को लेकर हुआ था विवाद
अभियोजन पक्ष के अनुसार मोटरसाइकिल और भैंस को लेकर हुए विवाद के बाद सुभाष यादव ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी थी। आरोप है कि हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव को जलाने का प्रयास किया गया। इसके बाद शव के टुकड़े कर अलग-अलग बोरियों में भरकर फेंक दिया गया।
जांच के दौरान मृतका के गले से मिली संदूक की चाबी के आधार पर उसकी पहचान रीना देवी के रूप में की गई थी। पुलिस ने मामले की जांच कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था।
कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा
मामले की सुनवाई बगहा के एडीजे-4 मानवेंद्र मिश्रा की अदालत में हुई। अदालत ने आरोपी सुभाष यादव को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी पाते हुए उम्रकैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
अदालत ने आदेश दिया कि जुर्माना नहीं देने की स्थिति में आरोपी को छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। वहीं, साक्ष्य मिटाने के आरोप में धारा 201 के तहत सात वर्ष की कैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा भी सुनाई गई।
वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर हुई सुनवाई
अभियोजन पक्ष ने अदालत में गवाहों के बयान के साथ वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य प्रस्तुत किए। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पीडी ट्रायल चलाया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार बगहा एसपी ने भी इस मामले की व्यक्तिगत रूप से निगरानी की थी।
बच्चों के भविष्य को लेकर अदालत का अहम आदेश
अदालत ने फैसले में दंपती के दोनों नाबालिग बच्चों के हितों को भी ध्यान में रखा। न्यायालय ने कहा कि मां की मृत्यु हो चुकी है और पिता को उम्रकैद की सजा मिली है, ऐसे में बच्चों के पालन-पोषण की विशेष व्यवस्था आवश्यक है।
इसी को देखते हुए कोर्ट ने बिहार सरकार को परवरिश योजना के तहत दोनों बच्चों को प्रति माह चार-चार हजार रुपये देने का निर्देश दिया है। साथ ही बच्चों को डीएलसी पुनर्वास योजना का लाभ उपलब्ध कराने का भी आदेश दिया गया है।
अदालत के इस फैसले को न केवल हत्या के मामले में न्याय दिलाने वाला माना जा रहा है, बल्कि उन दो मासूम बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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