पटना/सीतामढ़ी: बिहार की राजनीति में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा किसी घोषणा की नहीं, बल्कि एक सवाल की है—क्या नीतीश कुमार के बाद उनकी राजनीतिक विरासत निशांत कुमार संभालेंगे? सीतामढ़ी में जदयू के वरिष्ठ नेता और सांसद देवेश चंद्र ठाकुर के एक बयान ने इस सवाल को अचानक राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
रविवार को सीतामढ़ी में निशांत कुमार की मौजूदगी में देवेश चंद्र ठाकुर ने उनके भविष्य को लेकर कहा कि राजनीति में संभावनाएं हमेशा बनी रहती हैं और निशांत भविष्य में बिहार के मुख्यमंत्री बन सकते हैं। ठाकुर ने यह बात पत्रकारों के सवाल के जवाब में कही।
बयान छोटा, सियासी मायने बड़े
देवेश चंद्र ठाकुर का बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि निशांत कुमार ने इसी साल सक्रिय राजनीति में कदम रखा है और उनका राजनीतिक सफर अभी शुरुआती दौर में है। ऐसे में किसी वरिष्ठ जदयू नेता की ओर से उन्हें भविष्य के मुख्यमंत्री की संभावना से जोड़ना पार्टी के भीतर उत्तराधिकार की चर्चा को फिर सामने ले आया है।
हालांकि, इसे फिलहाल जदयू की आधिकारिक घोषणा या मुख्यमंत्री पद के लिए औपचारिक दावेदारी नहीं माना जा सकता। ठाकुर ने अपनी उम्मीद और राजनीतिक संभावना की बात कही है, जबकि निशांत की ओर से मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई दावा सामने नहीं आया है।
सीतामढ़ी में निशांत, सामने आए कार्यकर्ता
निशांत कुमार के सीतामढ़ी पहुंचने पर जदयू कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। इस दौरान उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी चर्चा हुई। निशांत ने कहा कि सीतामढ़ी आकर उन्हें खुशी हुई और वह समाज के सभी वर्गों के लिए काम करना चाहते हैं।
उन्होंने महिलाओं के साथ-साथ ओबीसी और ईबीसी वर्ग के लोगों के लिए काम करने की बात कही और कहा कि वह अपने पिता की तरह सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का प्रयास करेंगे।
‘पिता के पदचिह्नों पर चलें निशांत’
देवेश चंद्र ठाकुर ने नीतीश कुमार के लंबे राजनीतिक कार्यकाल का उल्लेख करते हुए उम्मीद जताई कि निशांत भी अपने पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ेंगे।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह निशांत को भविष्य में मुख्यमंत्री के रूप में देखते हैं, तो उन्होंने इसे राजनीति में संभव बताते हुए कहा कि निशांत जीवन में ऊंचाइयों तक पहुंचें।
यही एक टिप्पणी अब बिहार की सियासत में चर्चा का सबसे बड़ा कारण बन गई है।
अभी मुख्यमंत्री की कुर्सी से ज्यादा ‘विरासत’ की चर्चा
निशांत कुमार के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती मुख्यमंत्री पद की चर्चा नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक पहचान बनाने की है। सक्रिय राजनीति में उनका सफर अभी नया है। ऐसे में उनके कामकाज, संगठन में पकड़ और जनता के बीच स्वीकार्यता आने वाले समय में उनकी राजनीतिक भूमिका तय करने वाले महत्वपूर्ण कारक होंगे।
देवेश चंद्र ठाकुर ने भी निशांत के काम का अभी से आकलन करने को जल्दबाजी बताया। उनका तर्क है कि नए नेता को पहले काम करने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।
सीतामढ़ी से निकला बड़ा राजनीतिक संदेश
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री पद की चर्चा किसी पार्टी बैठक या आधिकारिक घोषणा से नहीं, बल्कि एक सार्वजनिक कार्यक्रम में पत्रकारों के सवाल के जवाब से शुरू हुई।
एक तरफ वरिष्ठ जदयू सांसद निशांत को भविष्य की बड़ी भूमिका के योग्य बता रहे हैं, दूसरी तरफ पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी उनके नेतृत्व को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है।
इससे बिहार की राजनीति में एक नया सवाल जरूर खड़ा हो गया है—क्या निशांत कुमार सिर्फ नीतीश कुमार के बेटे के रूप में राजनीति में आए हैं या आने वाले वर्षों में अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने की तैयारी कर रहे हैं?
अभी तस्वीर अधूरी, लेकिन चर्चा शुरू
फिलहाल निशांत कुमार का राजनीतिक सफर शुरुआती चरण में है। इसलिए उन्हें सीधे भविष्य का मुख्यमंत्री घोषित करना जल्दबाजी होगी। लेकिन देवेश चंद्र ठाकुर जैसे वरिष्ठ नेता का बयान यह जरूर बताता है कि जदयू के भीतर नीतीश कुमार के बाद की राजनीति को लेकर चर्चा पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
आने वाले दिनों में निशांत की सक्रियता, संगठन में उनकी भूमिका और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का रुख इस बहस को और दिशा दे सकता है।
यानी फिलहाल मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कोई फैसला नहीं हुआ है, लेकिन बिहार की सियासत में ‘नीतीश के बाद कौन?’ की बहस में निशांत कुमार का नाम अब खुलकर सामने आ गया है।
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