रामगढ़: सावन की तीसरी सोमवारी और नाग पंचमी के पावन संयोग पर रामगढ़ जिले के कैथा स्थित प्राचीन शिव मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही मंदिर परिसर में महिला-पुरुष भक्तों का तांता लगा रहा। भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए दूर-दरवाजा के क्षेत्रों से श्रद्धालु यहां पहुंचे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कैथा का यह प्राचीन शिव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। विशेषकर सावन माह, नाग पंचमी और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद भगवान शिव अवश्य पूरी करते हैं।
350 वर्ष पुराना है ऐतिहासिक मंदिर
कैथा शिव मंदिर का इतिहास लगभग 300 से 350 वर्ष पुराना बताया जाता है। कहा जाता है कि वर्ष 1670-1671 के आसपास रामगढ़ राज परिवार के राजा दलेर सिंह ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर अपनी अनूठी स्थापत्य कला के लिए भी प्रसिद्ध है।
यह मंदिर मुगल और हिंदू वास्तुकला का अद्भुत संगम माना जाता है। लखौरी ईंटों से निर्मित इस मंदिर की बनावट दो मंजिला है, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग पहचान देती है।
तहखाना और गुप्त सुरंग की भी है चर्चा
स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार मंदिर के निचले हिस्से में एक तहखाना और गुप्त सुरंग मौजूद है, जो कभी दामोदर नदी के तट तक जाती थी। कहा जाता है कि राजा और रानी इसी मार्ग से गुप्त रूप से मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचते थे। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह कथा आज भी लोगों के बीच चर्चित है।
राष्ट्रीय धरोहर के रूप में पहचान
मंदिर की ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व को देखते हुए इसे राष्ट्रीय धरोहर और संरक्षित स्मारक का दर्जा भी प्राप्त है। यही वजह है कि धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह स्थल इतिहास और स्थापत्य कला के प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
नाग पंचमी और तीसरी सोमवारी के अवसर पर मंदिर परिसर पूरी तरह शिवमय नजर आया। हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा, जबकि श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना की प्रार्थना करते दिखे।
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