लखीसराय: अशोकधाम में सावन की तीसरी सोमवारी पर हुए दर्दनाक हादसे के बाद सात श्रद्धालुओं की मौत ने पूरे बिहार को झकझोर दिया है। लेकिन हादसे के कई घंटे बाद भी सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि आखिर श्रद्धालुओं की मौत भगदड़ से हुई या करंट लगने से? जिला प्रशासन की ओर से लगातार भगदड़ को हादसे की वजह बताया जा रहा है, जबकि घटनास्थल से सामने आ रहे बयान और परिस्थितियां कई नए सवाल खड़े कर रही हैं।
जिलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार का कहना है कि अशोकधाम हॉल्ट पर एक साथ दो ट्रेनों के पहुंचने से अचानक भीड़ बढ़ गई और इसी कारण भगदड़ मची। प्रशासन का दावा है कि खेत में गिरा बिजली का पोल हादसे की वजह नहीं है, क्योंकि तार कवरयुक्त था और करंट से मौत की बात सही नहीं है।
हालांकि सवाल यह है कि यदि प्रशासन को पहले से भारी भीड़ आने की जानकारी थी तो भीड़ प्रबंधन की अतिरिक्त व्यवस्था क्यों नहीं की गई? सावन की तीसरी सोमवारी पर हर साल लाखों श्रद्धालु अशोकधाम पहुंचते हैं। ऐसे में दो ट्रेनों के एक साथ पहुंचने से हालात बिगड़ जाना क्या प्रशासनिक तैयारी की कमी की ओर इशारा नहीं करता?
घटना में घायल कई श्रद्धालुओं ने करंट फैलने की चर्चा और अचानक मची अफरा-तफरी की बात कही है। कुछ लोगों का कहना है कि बिजली के पोल और तार को लेकर दहशत फैली, जिसके बाद लोग जान बचाने के लिए भागने लगे। यदि ऐसा था तो मौके पर मौजूद सुरक्षा और प्रशासनिक कर्मी तत्काल स्थिति को नियंत्रित करने में क्यों सफल नहीं हुए?
स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे वाली जगह अपेक्षाकृत खुला क्षेत्र था। ऐसे में इतनी भयावह भगदड़ कैसे मच गई कि सात लोगों की जान चली गई। लोगों का यह भी कहना है कि श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए पर्याप्त सुरक्षा घेरा, अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग तथा भीड़ नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था दिखाई नहीं दी।
सबसे बड़ा प्रश्न प्रशासनिक दावों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के बीच के अंतर को लेकर खड़ा हो रहा है। एक ओर अधिकारी भगदड़ को कारण बता रहे हैं, दूसरी ओर गीली खेत में बिजली पोल गिरे रहने से करंट फैलने की चर्चा लगातार सामने आ रही है। जब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती, तब तक हादसे की असली वजह पर संशय बना रहेगा।
हादसे के बाद अब लोगों की मांग है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच हो। आखिर किस स्तर पर चूक हुई, भीड़ नियंत्रण की क्या तैयारी थी, बिजली व्यवस्था की क्या स्थिति थी और 8 श्रद्धालुओं की जान क्यों गई—इन सवालों के जवाब जनता जानना चाहती है।
फिलहाल अशोकधाम की यह त्रासदी केवल एक हादसा नहीं, बल्कि भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाली घटना बन गई है। मृतकों के परिजनों को न्याय और पूरे मामले की सच्चाई सामने लाना अब प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
