मुजफ्फरपुर: गंडक नदी के उफान ने पश्चिमी मुजफ्फरपुर में बाढ़ की स्थिति गंभीर कर दी है। पारू प्रखंड के चक्की सुहागपुर थाना परिसर में तीन फीट से अधिक पानी भर गया है। हालात ऐसे हैं कि पुलिसकर्मियों को थाने तक पहुंचने और प्रभावित इलाकों में गश्ती करने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। अपनी शिकायत लेकर थाने पहुंचने वाले ग्रामीणों के लिए भी नाव ही अब सहारा बनी हुई है।
गंडक के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी से साहेबगंज, पारू और सरैया प्रखंड के कई इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया है। कई जगह सड़क और संपर्क मार्ग पानी में डूबने से आवागमन प्रभावित हुआ है।
थाने में पानी, नाव बनी पुलिस की सवारी
चक्की सुहागपुर थाना परिसर में बाढ़ का पानी घुसने के बाद पुलिसकर्मियों की सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। परिसर में तीन फीट से ज्यादा पानी जमा होने के कारण थाना पहुंचना मुश्किल हो गया है। पुलिसकर्मी अब नाव के जरिए प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और गश्ती कर रहे हैं।
ग्रामीणों को भी शिकायत या किसी जरूरी काम के लिए थाने पहुंचने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। बाढ़ की स्थिति ने पुलिसिंग की सामान्य व्यवस्था को भी चुनौती दे दी है।
रेवा घाट पर खतरे के निशान से 97 सेंटीमीटर ऊपर गंडक
जल संसाधन विभाग के रियल टाइम आंकड़ों के अनुसार रेवा घाट पर गंडक का जलस्तर 55.38 मीटर दर्ज किया गया है। यहां खतरे का निशान 54.41 मीटर है। यानी नदी खतरे के निशान से करीब 97 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। आंकड़ों में जलस्तर बढ़ने की प्रवृत्ति भी दर्ज की गई है।
नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही आसपास के निचले इलाकों में पानी फैलने का खतरा लगातार बना हुआ है।
6,500 लोगों पर बाढ़ का असर
बताया जा रहा है कि चक्की सुहागपुर पंचायत में करीब 6,500 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। कई प्रमुख रास्तों पर पानी भर जाने से गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है। लोगों के सामने आवागमन के साथ-साथ भोजन, पीने के पानी और मवेशियों के चारे की समस्या भी बढ़ रही है।
रेवा मंदिर के आसपास भी पहुंचा पानी
गंडक के बढ़ते जलस्तर का असर सरैया के प्रसिद्ध रेवा मंदिर के आसपास भी दिखाई देने लगा है। पारू और आसपास के कई गांवों में बाढ़ का पानी फैल गया है। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से पश्चिमी मुजफ्फरपुर के साथ आसपास के इलाकों में भी बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
प्रशासन और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय हैं। स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार राहत एवं बचाव कार्य किए जा रहे हैं।
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