गया: स्कूल में बच्चे पढ़ रहे हों और ब्लैकबोर्ड की जगह लोहे का गेट ही क्लास का बोर्ड बन जाए… तस्वीर पहली नजर में जितनी हैरान करने वाली है, उसके पीछे की कहानी उससे भी ज्यादा दिलचस्प निकली। गया के गुरुआ प्रखंड स्थित चकजलपा स्कूल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल के गेट पर चॉक से लिखा जा रहा था। वीडियो सामने आते ही शिक्षा व्यवस्था से लेकर स्कूल की अंदरूनी कार्यप्रणाली तक पर सवाल उठने लगे।
गेट पर लिखी गई पढ़ाई ने खींचा सबका ध्यान
वायरल वीडियो में शिक्षक बच्चों को पढ़ाते नजर आ रहे हैं और लिखने के लिए स्कूल के बंद लोहे के दरवाजे का इस्तेमाल किया जा रहा है। देखते ही देखते यह तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई।
पहला सवाल यही उठा—आखिर सरकारी स्कूल में ब्लैकबोर्ड की जगह गेट क्यों?
स्थानीय स्तर पर स्कूल में बेंच और अन्य सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए।
लेकिन जांच शुरू हुई तो कहानी में आया ट्विस्ट
मामला सिर्फ वायरल वीडियो तक नहीं रुका। शिक्षा विभाग के अधिकारी स्कूल पहुंचे और पूरे मामले की जांच शुरू की।
यहीं से कहानी में नया मोड़ आया। एक शिक्षिका ने दावा किया कि ब्लैकबोर्ड की समस्या के कारण वह लंबे समय से गेट पर बच्चों को पढ़ा रही थीं और विभाग को इसकी जानकारी दी गई थी।
दूसरी तरफ स्कूल के अन्य शिक्षकों ने इस दावे को खारिज करते हुए इसे साजिश बताया। उनका कहना था कि स्कूल में मैनुअल ब्लैकबोर्ड मौजूद हैं और वे उन्हीं पर पढ़ाते हैं।
तीन कमरों में ब्लैकबोर्ड होने का भी दावा
जांच के दौरान सामने आई जानकारी के मुताबिक स्कूल के तीन कमरों में ब्लैकबोर्ड मौजूद होने की बात कही गई। स्कूल में करीब 170 बच्चे नामांकित बताए गए हैं और निरीक्षण के दौरान 114 बच्चों की उपस्थिति दर्ज होने की जानकारी सामने आई।
अब असली सवाल यह है कि अगर ब्लैकबोर्ड उपलब्ध था, तो गेट पर पढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी?
और अगर वास्तव में ब्लैकबोर्ड की कमी थी, तो इसकी शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान क्यों नहीं हुआ?
वीडियो ने सिर्फ स्कूल नहीं, सिस्टम को भी कटघरे में खड़ा कर दिया
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति सोशल मीडिया के कैमरे से सामने आएगी या विभागीय निरीक्षण से?
बीईओ ने स्कूल का निरीक्षण कर पठन-पाठन, शिक्षक उपस्थिति, छात्र उपस्थिति और मध्याह्न भोजन से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की। विभाग ने जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई की बात कही है।
अब गेट नहीं, जांच बताएगी असली ‘बोर्ड’ पर क्या लिखा है
इस मामले में सबसे दिलचस्प बात यही है कि वायरल वीडियो ने जो कहानी दिखाई, जांच में उसके पीछे की कहानी कुछ अलग दावों के साथ सामने आई।
शिक्षिका का दावा कुछ और है, बाकी शिक्षकों का पक्ष कुछ और। ऐसे में अब यह तय करना विभाग का काम है कि आखिर गेट पर पढ़ाई मजबूरी थी, लापरवाही थी या फिर किसी विवाद का हिस्सा?
रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि चकजलपा स्कूल में असली समस्या ब्लैकबोर्ड की थी या फिर मामला स्कूल की अंदरूनी खींचतान से जुड़ा था।
फिलहाल एक बात तय है—एक बंद गेट ने गया की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल जरूर खोल दिया है।
ये खबर भी पढ़े: RJD ने MLC चुनाव में खोले पत्ते, 6 सीटों पर उतारे उम्मीदवार; दरभंगा से अनिल झा तो पटना से संजीव सिंह-दिलीप कुमार को टिकट!