पटना: जिस उम्र में मां को अपने बच्चों का सहारा, घर की छांव और सम्मान मिलना चाहिए, उस उम्र में पटना की एक बुजुर्ग महिला सड़क किनारे जिंदगी गुजारने को मजबूर है। खाजेकलां थाना क्षेत्र के आसपास पिछले करीब तीन महीने से रह रही शांति देवी की कहानी ने अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर परिवार और समाज दोनों के सामने एक भावुक सवाल खड़ा कर दिया।
शांति देवी, पति स्वर्गीय रामचंद्र प्रसाद, टिकिया टोली की रहने वाली बताई जाती हैं। उनका आरोप है कि बेटे अशोक ने उन्हें घर से बाहर कर दिया। इसके बाद से वह खाजेकलां थाना के आसपास खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
आंखों में आंसू, फिर भी बेटे के लिए शिकायत से ज्यादा दर्द
अपनी स्थिति बताते हुए शांति देवी भावुक हो जाती हैं। वह कहती हैं कि बुढ़ापे में बेटा ही मां का सबसे बड़ा सहारा होता है, लेकिन आज उनके पास रहने के लिए अपना घर तक नहीं है।
उनके पोता-पोती भी हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके रहने और जीवनयापन की स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी है। दिन हो या रात, सड़क किनारे गुजरता समय अब उनकी मजबूरी बन चुका है।
तीन महीने से देख रहे हैं स्थानीय लोग
खाजेकलां थाना के पास मोची का काम करने वाले 48 वर्षीय इंद्रजीत दास बताते हैं कि वह करीब तीन महीने से शांति देवी को सड़क किनारे रहते देख रहे हैं। अपनी क्षमता के अनुसार वह कभी भोजन तो कभी जरूरत की दूसरी चीजें उपलब्ध कराते हैं।
आसपास के कुछ लोग भी समय-समय पर बुजुर्ग महिला की मदद करते हैं। इन्हीं छोटी-छोटी मदद के सहारे शांति देवी का जीवन किसी तरह चल रहा है।
वृद्धजन दिवस पर मंत्री तक पहुंची बुजुर्ग मां की कहानी
एक अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर पटना सिटी स्थित अपना घर वृद्ध आश्रम में समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने बुजुर्गों से मुलाकात की और उनके सम्मान व देखभाल की जरूरत पर बात रखी।
मंत्री ने कहा कि 60 वर्ष की उम्र के बाद वरिष्ठ नागरिकों के पास जीवन का लंबा अनुभव होता है, जिसे वे अगली पीढ़ी तक पहुंचाते हैं। उन्होंने माता-पिता और बुजुर्गों के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी निभाने की जरूरत पर जोर दिया।
इसी कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों ने खाजेकलां के पास सड़क किनारे रह रही शांति देवी की स्थिति की जानकारी मंत्री को दी।
मंत्री ने लिया संज्ञान, अधिकारियों को दिए निर्देश
मामले की जानकारी मिलते ही समाज कल्याण मंत्री ने इसे गंभीरता से लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने की बात कही। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग महिला को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
मंत्री ने यह भी कहा कि यदि मामले में किसी की जिम्मेदारी या लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब इंतजार है उस छत का, जिसकी उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत है
शांति देवी की कहानी सिर्फ एक बुजुर्ग महिला की परेशानी नहीं, बल्कि परिवार और समाज के लिए एक बड़ा सवाल है। जिस उम्र में किसी मां को अपने बच्चों के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिलना चाहिए, उस उम्र में सड़क किनारे गुजरते दिन-रात कई सवाल छोड़ जाते हैं।
अब प्रशासनिक पहल के बाद उम्मीद है कि शांति देवी को सुरक्षित आश्रय, भोजन और जरूरी सहायता मिल सकेगी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि तीन महीने से खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर इस बुजुर्ग मां को आखिर कब मिलेगी अपने हिस्से की छांव?
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