पटना: बिहार में अक्टूबर के आखिरी दिनों में मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। मानसून की विदाई के बाद जहां लोग मौसम सामान्य होने की उम्मीद कर रहे थे, वहीं बंगाल की खाड़ी में बन रहा निम्न दबाव का क्षेत्र बारिश की नई वजह बन सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के मुताबिक, 28 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 के बीच बिहार के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। वहीं, 29 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।
इस दौरान राज्य के कुछ इलाकों में गरज-चमक, वज्रपात और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने का भी अनुमान है। मौसम में होने वाला यह बदलाव किसानों के लिए चिंता बढ़ा सकता है, क्योंकि कई जगह खरीफ फसलों की कटाई का समय है। ऐसे में खेतों में खड़ी धान की फसल और कटाई के बाद खुले में रखे अनाज को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
बंगाल की खाड़ी में बन रहा मौसम का सिस्टम
मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, 23 अक्टूबर को दक्षिण-पूर्वी और उससे सटे पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक निम्न दबाव का क्षेत्र बना था। इससे संबंधित चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से करीब 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ था।
पूर्वानुमान के अनुसार, इस सिस्टम के 24 अक्टूबर को अवदाब और 25 अक्टूबर को गहरे अवदाब में बदलने की संभावना जताई गई थी। इसके बाद 26 अक्टूबर की सुबह तक इसके चक्रवाती तूफान में तीव्र होने का अनुमान था। इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तटों की ओर जाने की संभावना भी व्यक्त की गई थी।
इसी मौसम प्रणाली के प्रभाव से बिहार में अक्टूबर के अंतिम दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। हालांकि, सिस्टम की वास्तविक दिशा, तीव्रता और बिहार पर पड़ने वाले प्रभाव के लिए मौसम विभाग के ताजा अपडेट पर नजर रखना जरूरी है।
29 अक्टूबर को भारी बारिश की संभावना
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 28 अक्टूबर से 1 नवंबर तक राज्य के अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस अवधि में 29 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
बारिश के साथ कुछ इलाकों में मेघगर्जन, वज्रपात और तेज झोंकेदार हवाएं भी चल सकती हैं। खराब मौसम का असर स्थानीय जनजीवन, खेती-किसानी और खुले में रखी सामग्री पर पड़ सकता है।
ध्यान रहे कि यह मौसम पूर्वानुमान है। बारिश की तीव्रता और असर जिले तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
धान की फसल पर सबसे ज्यादा चिंता
बिहार के किसानों के लिए यह मौसम अहम समय पर बदल सकता है। खरीफ फसलों की कटाई के दौरान बारिश होने से खेतों में खड़ी फसल के साथ कटाई के बाद सुखाने के लिए रखे गए धान को भी नुकसान पहुंच सकता है।
तेज हवा से खड़ी फसल गिरने और लगातार नमी रहने से फसल को सुरक्षित रखने में परेशानी हो सकती है। फलदार पेड़ों और सब्जियों पर भी खराब मौसम का असर पड़ने की आशंका है।
मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि पकी हुई फसल की कटाई के बाद उसे सुरक्षित स्थान पर रखें। खुले में सुखाने के लिए रखी गई फसल को बारिश से बचाने का इंतजाम करें। यदि कटाई टालना संभव हो, तो मौसम की स्थिति सामान्य होने तक इंतजार करें। सब्जियों की फसलों में फिलहाल सिंचाई भी मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर करें।
आंधी, वज्रपात और तेज हवा से भी सतर्क रहें
बारिश के साथ बिजली गिरने और तेज हवा चलने की आशंका को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। खराब मौसम के दौरान कच्चे मकानों, झुग्गी-झोपड़ियों और टीन की छतों को नुकसान पहुंच सकता है।
आकाशीय बिजली चमकने या गरज सुनाई देने पर खुले मैदान, ऊंचे पेड़, जलाशय और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें। सुरक्षित पक्के भवन के अंदर शरण लें। खराब मौसम में अनावश्यक यात्रा से बचें और स्थानीय प्रशासन तथा आपदा प्रबंधन विभाग की सलाह का पालन करें।
बिहार के लोगों को क्या करना चाहिए?
- मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान और जिलेवार चेतावनियों पर नजर रखें।
- किसान कटी हुई फसल को सुरक्षित और ढके हुए स्थान पर रखें।
- खुले में रखे अनाज को बारिश से बचाने की व्यवस्था करें।
- बिजली चमकने के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े न हों।
- तेज हवा और बारिश के दौरान कमजोर छतों तथा असुरक्षित ढांचों से दूर रहें।
कुल मिलाकर, अक्टूबर के आखिरी दिनों में बिहार में मौसम का मिजाज बदलने की संभावना है। खासकर किसानों को फसल बचाने के लिए पहले से तैयारी करनी होगी। बारिश और आंधी की वास्तविक स्थिति के लिए मौसम विभाग के ताजा जिलेवार अपडेट को प्राथमिकता दें।
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