हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने समाज में परंपरा, रिश्तों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। चौपारण प्रखंड के पांडेबारा गांव में एक पिता ने अपनी जीवित बेटी का श्राद्धकर्म और पिंडदान कर दिया। वजह सिर्फ इतनी थी कि बेटी ने परिवार की इच्छा के विरुद्ध प्रेम विवाह कर लिया।
जानकारी के अनुसार, खेमन प्रसाद की 18 वर्षीय बेटी करीब एक माह पहले घर छोड़कर चली गई थी। बाद में परिजनों को पता चला कि वह नरैना गांव निवासी पवन साव के साथ है। बेटी के लापता होने पर परिवार ने चौपारण थाना में शिकायत दर्ज कराई थी।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब एक महीने बाद युवती और युवक को आंध्र प्रदेश से बरामद किया और चौपारण लेकर आई। थाना पहुंचने पर परिजनों ने युवती को घर लौटने और अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिए समझाने का प्रयास किया, लेकिन युवती अपने प्रेमी के साथ रहने के फैसले पर कायम रही।
परिवार के मुताबिक, जब युवती अपने निर्णय से पीछे नहीं हटी तो उससे सभी रिश्ते खत्म करने का फैसला लिया गया। इसके बाद पिता, भाई और अन्य परिजन गांव के श्मशान घाट पहुंचे, जहां युवती की तस्वीर रखकर हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार मुंडन, श्राद्धकर्म और पिंडदान किया गया।
घटना के बाद पूरे इलाके में इसकी चर्चा शुरू हो गई है। एक पक्ष इसे परिवार की सामाजिक और भावनात्मक प्रतिक्रिया बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे बदलते समय में व्यक्तिगत पसंद और पारिवारिक परंपराओं के टकराव का उदाहरण मान रहा है।
फिलहाल युवती अपने पति के साथ ससुराल में रह रही है। वहीं चौपारण थाना प्रभारी पंकज कुमार ने बताया कि पुलिस ने युवती को बरामद कर कानूनी प्रक्रिया पूरी की थी। इसके बाद परिवार द्वारा उठाए गए कदम उनका निजी निर्णय है।
यह घटना सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि उस सामाजिक संघर्ष की तस्वीर भी है, जहां एक ओर नई पीढ़ी अपने फैसले खुद लेना चाहती है और दूसरी ओर समाज का एक वर्ग अब भी पारंपरिक मान्यताओं से बंधा हुआ है।
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