सुल्तानगंज: सावन महीने में कांवड़ियों की आस्था और भक्ति के कई रंग देखने को मिलते हैं, लेकिन इस बार कांवड़िया पथ पर एक शिवभक्त अपनी अनोखी साधना के कारण चर्चा का केंद्र बना हुआ है। पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर निवासी 28 वर्षीय राजकुमार महतो, जिन्हें श्रद्धालु अब ‘बिच्छू बम’ के नाम से पुकार रहे हैं, हाथों के सहारे सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर तक की 105 किलोमीटर लंबी यात्रा पूरी करने में जुटे हैं।
राजकुमार महतो की भक्ति का अंदाज बेहद अलग है। वह पैरों के बजाय दोनों हाथों पर शरीर का पूरा भार उठाकर आगे बढ़ते हैं। इस दौरान उनके पैर हवा में ऊपर रहते हैं और उनकी मुद्रा बिच्छू जैसी दिखाई देती है। यही वजह है कि कांवड़िया पथ पर लोगों ने उन्हें ‘बिच्छू बम’ नाम दे दिया है।
दूसरी बार कर रहे कठिन तपस्या
राजकुमार पहली बार यह कठिन यात्रा नहीं कर रहे हैं। इससे पहले भी वह हाथों के सहारे बाबाधाम की यात्रा पूरी कर चुके हैं। इस वर्ष उन्होंने एक बार फिर उसी कठिन संकल्प को दोहराया है। उनका कहना है कि यह यात्रा उनके लिए केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति समर्पण और आस्था की अभिव्यक्ति है।
श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने
कांवड़िया पथ पर जहां-जहां से राजकुमार गुजरते हैं, वहां श्रद्धालुओं की भीड़ जुट जाती है। कोई उनकी तस्वीर और वीडियो बनाता है तो कोई ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों के साथ उनका उत्साह बढ़ाता है। उनकी अनोखी भक्ति को देखने के लिए लोग कुछ देर रुककर उन्हें निहारते हैं।
20 दिनों से जारी है सफर
करीब 105 किलोमीटर लंबी इस कठिन यात्रा को पूरा करने में राजकुमार को काफी समय लग रहा है। वह प्रतिदिन लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी ही हाथों के सहारे तय कर पाते हैं। जानकारी के अनुसार, वह पिछले 20 दिनों से लगातार इसी मुद्रा में यात्रा कर रहे हैं।
कठिन शारीरिक चुनौतियों के बावजूद राजकुमार महतो का संकल्प अटूट है। हाथों के बल आगे बढ़ते ‘बिच्छू बम’ की यह अनोखी कांवड़ यात्रा इन दिनों श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है और शिवभक्ति की मिसाल पेश कर रही है।
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