भारत/नेपाल: नेपाल के प्रमुख शहर पोखरा में हजारों नेपाली युवाओं, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों ने भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती बहाल करने की मांग को लेकर विशाल रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भारतीय सेना में गोरखा सैनिकों की भर्ती वर्षों से नेपाली युवाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम रही है, लेकिन 2022 में अग्निवीर योजना लागू होने के बाद यह प्रक्रिया ठप पड़ गई है।
भारतीय सेना में नेपाली गोरखाओं की भर्ती वर्ष 2019 से बंद है। शुरुआत में कोविड-19 महामारी के कारण भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हुई थी, लेकिन बाद में भारत सरकार द्वारा अग्निपथ योजना लागू किए जाने के बाद नेपाल सरकार ने अपने नागरिकों की इस योजना के तहत भर्ती पर रोक लगा दी।
नेपाल सरकार की आपत्ति क्या है?
नेपाल सरकार का मानना है कि अग्निवीर योजना भारत, नेपाल और ब्रिटेन के बीच वर्ष 1947 में हुए त्रिपक्षीय समझौते की भावना के अनुरूप नहीं है। इस योजना में सैनिकों की सेवा अवधि चार वर्ष निर्धारित है और केवल लगभग 25 प्रतिशत जवानों को स्थायी सेवा का अवसर मिलता है। शेष 75 प्रतिशत जवानों को सेवा समाप्ति के बाद एकमुश्त राशि देकर मुक्त कर दिया जाता है। उन्हें पेंशन और दीर्घकालिक सैन्य लाभ नहीं मिलते।
इसी कारण नेपाल सरकार ने अग्निवीर योजना के तहत अपने युवाओं की भर्ती को मंजूरी नहीं दी है।
युवाओं का तर्क
प्रदर्शन में शामिल युवाओं का कहना है कि नेपाल में रोजगार के अवसर सीमित हैं और बड़ी संख्या में युवाओं को काम की तलाश में खाड़ी देशों का रुख करना पड़ता है। उनका मानना है कि भारतीय सेना में अग्निवीर के रूप में भर्ती होने का अवसर मिलने से युवाओं को सम्मानजनक रोजगार मिलेगा और गोरखा सैनिकों की ऐतिहासिक पहचान भी बनी रहेगी।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया को तत्काल बहाल किया जाए। उनका कहना है कि यह केवल रोजगार का मुद्दा नहीं, बल्कि गोरखा समुदाय की सैन्य परंपरा और गौरव से भी जुड़ा हुआ विषय है।
पूर्व सैनिक भी हुए शामिल
यह प्रदर्शन “इंडियन एक्स-सर्विसमेन गोरखा ब्रिगेड नेपाल” के बैनर तले आयोजित किया गया। रैली में भारतीय सेना से सेवानिवृत्त गोरखा सैनिक, उनके परिवार और सैन्य भर्ती की तैयारी कर रहे युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए। हाथों में तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों ने सरकार से अपना रुख बदलने की अपील की।
रैली पोखरा स्टेडियम से शुरू होकर जिला प्रशासन कार्यालय तक पहुंची, जहां प्रतिनिधिमंडल ने कास्की जिले के मुख्य जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने यह मांग भी उठाई कि पूर्व सैनिकों के संगठनों के पंजीकरण पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई जानी चाहिए, क्योंकि ऐसे संगठन पूर्व सैनिकों के अधिकारों और हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नेपाल में बढ़ते इस जनदबाव के बीच अब नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह अग्निवीर भर्ती को लेकर अपने रुख में कोई बदलाव करती है या नहीं।
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