औरंगाबाद: राम मंदिर में चंदा और चढ़ावे की कथित अनियमितता के विरोध में कांग्रेस के पूर्व विधायक आनंद शंकर सिंह के नेतृत्व में मंगलवार को सुंदरकांड पाठ और हवन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। आयोजकों के अनुसार, सुंदरकांड पाठ और हवन का उद्देश्य मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों को सद्बुद्धि देने के लिए भगवान राम से प्रार्थना करना था।
कार्यक्रम के दौरान पूर्व विधायक आनंद शंकर सिंह ने मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दिए जाने वाले चंदे और दान की संपत्ति में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भगवान राम का मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है। किसान, मजदूर, गरीब और संपन्न वर्ग के लोगों ने अपनी श्रद्धा के अनुसार मंदिर के लिए दान दिया है। ऐसे में चंदे और चढ़ावे में किसी प्रकार की अनियमितता के आरोप गंभीर विषय हैं।
चांदी की ईंट और आभूषणों के दान का दावा
आनंद शंकर सिंह ने दावा किया कि मंदिर के लिए सिंधी समाज सहित अन्य श्रद्धालुओं ने चांदी की ईंटें, सोना-चांदी, आभूषण और नकद राशि दान की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब दो करोड़ रुपये मूल्य की चांदी की ईंटें भी दान की गईं, लेकिन कथित तौर पर दान की पूरी सूची तैयार नहीं की गई और दानदाताओं को रसीद नहीं दी गई।
उन्होंने मंदिर ट्रस्ट की संरचना और उसके कामकाज पर भी सवाल उठाए। पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के अधिकांश सदस्य VHP, RSS और भाजपा से जुड़े रहे हैं और ट्रस्ट की इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर कथित वित्तीय अनियमितताएं की गईं।
हालांकि, पूर्व विधायक द्वारा लगाए गए इन आरोपों के समर्थन में कार्यक्रम के दौरान कोई स्वतंत्र ऑडिट रिपोर्ट या आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हो सकी है।
ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
आनंद शंकर सिंह ने आरोप लगाया कि मंदिर ट्रस्ट को स्वायत्त व्यवस्था के तहत काम करने का अधिकार मिला हुआ है और इसी कारण उसके कामकाज को लेकर पारदर्शिता का सवाल उठता रहा है। उन्होंने दावा किया कि समय-समय पर ऑडिट में भी अनियमितताओं की बातें सामने आती रही हैं। उन्होंने VHP के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय और ट्रस्ट से जुड़े लोगों पर भी गंभीर आरोप लगाए।
पूर्व विधायक ने कहा कि मंदिर और उससे जुड़े धार्मिक स्थलों में श्रद्धालुओं की आस्था सर्वोपरि है। इसलिए दान और चढ़ावे से संबंधित सभी मामलों में पारदर्शिता होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि दान में प्राप्त नकद राशि, सोना-चांदी, आभूषण और अन्य संपत्तियों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया जाए।
कार्यक्रम के अंत में सुंदरकांड पाठ और हवन किया गया। आयोजकों ने कहा कि भगवान राम से प्रार्थना की गई कि मंदिर से जुड़े लोगों को सद्बुद्धि मिले और भविष्य में किसी भी धार्मिक आस्था के केंद्र पर श्रद्धालुओं के दान के संबंध में अनियमितता की स्थिति पैदा न हो।
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